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देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 90 फीसदी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के

डीआईयू ने अपने रिसर्च में पाया कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक कम से कम 25 शहरों का AQI 'बहुत खराब' की श्रेणी में पहुंच गया था. इन 25 में से 90 प्रतिशत से ज्यादा शहर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हैं. सबसे ज्यादा प्रदूषित इन 25 शहरों में से 15 हरियाणा में और 8 उत्तर प्रदेश में हैं. बाकी दो शहर राजस्थान का भिवाड़ी और दिल्ली हैं.

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दिल्ली में लगातार खराब होता जा रहा हवा का स्तर (पीटीआई) दिल्ली में लगातार खराब होता जा रहा हवा का स्तर (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अक्टूबर तक 25 शहरों का AQI 'बहुत खराब' की श्रेणी में
  • 25 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में 15 हरियाणा, 8 यूपी के शहर
  • 29 अक्टूबर को चरखी दादरी में AQI 418 हो गया
  • HARSAC की रिपोर्ट, इस साल 27% ज्यादा जली पराली

हर साल दिवाली के आसपास देश के उत्तरी हिस्से में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा खतरनाक हो चुकी है और इन दिनों सबसे ज्यादा सुर्खियों में है. हालांकि, सबसे ज्यादा जहरीली हवा दिल्ली की नहीं है. दिल्ली के आसपास के अन्य राज्यों में भी लोग बेहद खतरनाक हवा में सांस ले रहे हैं.

इंडिया टुडे की डेटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU)ने देश के विभिन्न शहरों के वायु गुणवत्ता सूचकांक का डेटा स्कैन किया और पाया कि दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहर देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित हैं.

हरियाणा और उत्तर प्रदेश टॉप पर  

इस विश्लेषण के लिए डीआईयू ने 1 सितंबर से 2 नवंबर तक के आंकड़े लिए. सितंबर के पहले सप्ताह में स्थिति बहुत हद तक नियंत्रण में थी क्योंकि ज्यादातर शहरों में एक्यूआई 0-100 के बीच दर्ज किया गया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)के मुताबिक, अगर एक्यूआई 0-50 के बीच है तो इसका मतलब है कि हवा की गुणवत्ता अच्छी है. अगर एक्यूआई 51-100 के बीच है तो हवा की क्वालिटी संतोषजनक होती है.

सितंबर के पहले हफ्ते में हवा की गुणवत्ता अच्छी थी लेकिन बाद के हफ्तों में यह मध्यम श्रेणी (AQI 101-200) हो गई. मध्य अक्टूबर तक हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ (AQI 201-300) की श्रेणी में आ गई. इसके बाद यह ‘बहुत खराब’ (AQI 301-400) की श्रेणी में आ गई.

डीआईयू ने पाया कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक कम से कम 25 शहरों का AQI 'बहुत खराब' की श्रेणी में पहुंच गया था. इन 25 में से 90 प्रतिशत से ज्यादा शहर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हैं. सबसे ज्यादा प्रदूषित इन 25 शहरों में से 15 हरियाणा में और 8 उत्तर प्रदेश में हैं. बाकी दो शहर राजस्थान का भिवाड़ी और दिल्ली हैं.

27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक दिल्ली से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित हरियाणा का चरखी दादरी देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा. शहर में औसत एक्यूआई 388 दर्ज किया गया, जो कि ‘खतरनाक’ (AQI 400) श्रेणी के काफी करीब है.
 
लेकिन दैनिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले सप्ताह में दो बार ऐसा हुआ जब इस शहर ने ‘खतरनाक’ हवा में सांस ली. 27 और 29 अक्टूबर को चरखी दादरी में AQI क्रमशः 411 और 418 रहा.
 
खराब-क्वालिटी वाली हवा में लंबे समय तक सांस ली जाए तो यह सांस की बीमारी का कारण बन सकती है. सीपीसीबी का बुलेटिन यह भी कहता है कि अगर लंबे समय तक ‘खतरनाक’ क्वालिटी की हवा (एक्यूआई 400+) में सांस ​ली जाए तो स्वस्थ लोगों पर भी इसका गंभीर असर हो सकता है. आंकड़ों से पता चलता है कि सबसे ज्यादा प्रदूषित इन शहरों में पहले ही कुछ दिनों के लिए AQI 400 के पार जा चुका है.

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दूसरा सबसे प्रदूषित शहर जींद है जिसके AQI का साप्ताहिक औसत 376 दर्ज किया गया है. यहां पिछले एक हफ्ते में 400 से ऊपर AQI तीन बार दर्ज किया गया. 27, 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को जींद में क्रमशः 405, 405 और 425 एक्यूआई दर्ज किया गया.
 
जींद के बाद ग्रेटर नोएडा में पिछले हफ्ते औसत एक्यूआई 361 दर्ज किया गया. इसके बाद बागपत (361), फतेहाबाद (358), गाजियाबाद (356), भिवाड़ी (352), बुलंदशहर (349) और नोएडा (349) रहे. औसतन 343 एक्यूआई के साथ दिल्ली 10वें नंबर पर है जहां की हवा की क्वालिटी बहुत खराब की श्रेणी में है.
 
प्रमुख कारण है पराली जलाना

इस सीजन में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की कटाई होती है. कटाई के बाद किसान धान की पराली को खेतों में जला देते हैं, क्योंकि खेत साफ करके अगली फसल की बुवाई करनी होती है.  

हालांकि, खेत में पराली जलाने से रोकने के कुछ विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन किसानों को पराली जला देना ही आसान लगता है. दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में हवा को मुख्य रूप से प्रदूषित करने वाले कण पीएम2.5 का 40 प्रतिशत खेत में पराली जलाने का नतीजा है. हर साल इसके लिए नोटिस भेजे जाते हैं, बैठकें होती हैं, स्थिति को सुधारने के लिए पैसा खर्च किया जाता है, लेकिन खेत में पराली जलाने की प्रथा जारी है.

हरियाणा स्पेस अप्लीकेशन सेंटर (HARSAC) के आंकड़ों के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल की तुलना में इस साल 27 प्रतिशत ज्यादा हुई हैं.  

राजधानी दिल्ली के लिए आशा की किरण यही है कि यहां अभी तक ‘खतरनाक’ श्रेणी का AQI दर्ज नहीं किया गया है. पिछले साल चार साल से 1 नवंबर तक दिल्ली की हवा ‘खतरनाक’ श्रेणी में पहुंच जाती थी. हालांकि, दिवाली के बाद चीजें बदल जाती हैं जब तापमान नीचे गिरता है, खेत में जलने वाली पराली का प्रदूषण पटाखों के प्रदूषण से मिलकर और खतरनाक हो जाता है.

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