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दो जज कोरोना संक्रमित, फिर वर्क फ्रॉम होम मोड में आया सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के दो जजों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के  बाद अब सुप्रीम कोर्ट भी वर्क फ्रॉम होम मोड में आ गया है.

Supreme Court Supreme Court
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वर्क फ्रॉम होम मोड में आया सुप्रीम कोर्ट
  • कोरोना संक्रमित हुए SC के दो जज

सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के  बाद अब सुप्रीम कोर्ट भी वर्क फ्रॉम होम मोड में आ गया है. सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को चीफ जस्टिस सहित पांच शीर्षस्थ जज जब साढ़े दस बजे के बाद भी अपने अपने अदालत कक्षों में नहीं आए तो सबको लगा कि कोलेजियम की मीटिंग चल रही होगी. लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि दरअसल पंचों सीनियर मोस्ट जज सुप्रीम कोर्ट परिसर में कोविड की स्थिति की समीक्षा और हालात से निपटने के उपाय तलाश रहे थे. 

मीटिंग में लिए फैसले के मुताबिक शुक्रवार से सभी जज अपने अपने घरों से ही सुनवाई करेंगे. यानी फिर से समय चक्र करीब पौने दो साल पीछे चला गया है. 22 मार्च 2020 से सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई शुरू हो गई थी. फिर संकट और बढ़ा तो सभी जज, रजिस्ट्रार और स्टाफ तक वर्क फ्रॉम होम मोड में चले गए थे. 2021 के अंत में कोर्ट फिर से फिजिकल सुनवाई के लिए तैयार हुआ. लेकिन अब फिर पिछले सालों जैसी स्थिति हो गई है. यानी सुनवाई के दौरान वीडीओ स्क्रीन पर अलग अलग विंडो में जज और वकील होंगे. स्क्रीन पर प्रोपर सोशल डिस्टेंस रहेगा.

कोविड की तीसरी लहर यानी ओमिक्रॉन के लगातार और बेतहाशा बढ़ते संक्रमण के चलते सुप्रीम कोर्ट में अब सिर्फ वर्चुअल सुनवाई ही होगी. जज अदालत कक्ष के बजाय अपने आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के लिए शामिल होंगे.

सिर्फ बहुत जरूरी मामले, नए मामले, जमानत मामले, स्टे से जुड़े मामले, नजरबंदी या बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी हेवियस कॉर्पस के मामले और सुनवाई के लिए पहले से निश्चित तारीख के मामलों की सुनवाई 10 जनवरी से की जाएगी. इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से रोशनी डालते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सर्कुलर जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने बढ़ाया न्यायिक वेतन आयोग का कार्यकाल

न्यायिक वेतन आयोग का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने बढ़ाया है. निचली अदालतों में सुविधाएं बढ़ाकर वहां की हालत में सुधार लाने और जजों और अधिकारियों के वेतन, भत्ते, पेंशनआदि की सिफारिशों की रिपोर्ट देने के बाद अब निचली अदालतों की कार्यप्रणाली और कामकाज का उपयुक्त वातावरण बनाने लिए दूसरे राष्ट्रीय वेतन आयोग को अब तीन महीने और मिल गए हैं. 

सुप्रीम कोर्ट ने ये रिटायर्ड न्यायाधीश जस्टिस पीवी रेड्डी की अध्यक्षता में जस्टिस आर बसंत के साथ दो सदस्यीय आयोग बनाया था. अमाईकस क्यूरे सीनियर एडवोकेट परमेश्वर ने चीफ जस्टिस एनवी रमणा की अगुआई वाली पीठ को बताया कि आयोग के अध्यक्ष और सदस्य ने तय कर लिया है कि उन्होंने अप्रैल 2020 से कोई वेतन भत्ता या मानदेय नहीं लिया है. वो वैसे ही सद्भावना से ये काम कर रहे हैं. अपनी बाकी बची हुई रिपोर्ट सौंपने के लिए मोहलत मांगी गई.

आयोग की तरफ से परमेश्वरन ने कहा कि रिपोर्ट तैयार है बस उसे फाइनल स्वरूप देकर जमा करना है. कोर्ट ने उनको तीन महीने का एक्सटेंशन दिया. ऑल इंडिया जजेज एसोसियेशन की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने आयोग बनाया था. ये द्वितीय आयोग है जिसके सामने ऑल इंडिया जजेज एसोसियेशन ने 2020 के नवंबर में अपना रिप्रेजेंटेशन दिया था. 

अपनी रिपोर्ट के पहले हिस्से में आयोग ने निचली अदालतों. के जजों और न्यायिक अधिकारियों के वेतन, भत्ते,पेंशन और अन्य सुविधाओं पर विस्तार से अपनी सिफारिशें दी हैं. अब कार्य स्थल का माहौल और कार्यक्षमता बढ़ाने के उपायों पर आयोग अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगा.

 

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