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'अगर अग्निपथ स्कीम पसंद नहीं तो आर्म्ड फोर्स में शामिल न हों, कोई मजबूरी नहीं है', प्रदर्शनकारियों से बोले वीके सिंह

महाराष्ट्र के नागपुर में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिंह ने कहा कि भारतीय सेना जबरन सैनिकों की भर्ती नहीं करती है. उम्मीदवार अपनी मर्जी से इसमें शामिल हो सकते हैं.

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 पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह. -फाइल फोटो पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह. -फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रियंका गांधी के बयान को लेकर सिंह ने साधा निशाना
  • सेना न तो रोजगार एजेंसी है और न ही कंपनी या दुकान: सिंह

'अग्निपथ' योजना को लेकर हुई हिंसा के बीच केंद्रीय मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह (सेवानिवृत्त) ने रविवार को प्रदर्शनकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर उन्हें सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए नई नीति पसंद नहीं है तो उन्हें चाहिए इसे मत चुनो.

वीके सिंह ने कहा कि सेना में शामिल होना स्वैच्छिक है और मजबूरी नहीं है. यदि कोई इच्छुक शामिल होना चाहता है, तो वह अपनी इच्छा के अनुसार शामिल हो सकता है. लेकिन अगर आपको यह भर्ती योजना ('अग्निपथ') पसंद नहीं है तो मत आओ. आपको आने के लिए कौन कह रहा है? आप (प्रदर्शनकारी) बसों और ट्रेनों को जला रहे हैं. आपसे किसने कहा कि आपको भर्ती किया जाएगा. पात्रता मानदंडों को पूरा करने पर ही आपका चयन किया जाएगा.

उधर, सिंह की टिप्पणियों के एक वीडियो को टैग करते हुए, कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने उन पर कटाक्ष करते हुए कहा, "जो व्यक्ति अपनी सेवानिवृत्ति को स्थगित करने के लिए अदालत गया था, वह युवाओं को 23 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने के लिए कह रहा है."

प्रियंका गांधी के बयान को लेकर सिंह ने साधा निशाना

बता दें कि दिल्ली में दिन पहले प्रियंका गांधी ने एक बयान में कहा था कि 'अग्निपथ' योजना युवाओं के साथ-साथ सेना को भी नष्ट कर देगी. इस बयान को लेकर सिंह ने कहा, "कांग्रेस परेशान है क्योंकि राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पूछताछ कर रहा है. इसलिए, पार्टी सरकार के सर्वोत्तम कार्यों में भी दोष ढूंढती है.

उन्होंने कहा, "विपक्ष, खासकर कांग्रेस, युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रही है. विपक्ष के पास एक ही काम बचा है, वह है किसी भी सरकारी योजना की आलोचना करना और उसे रोकना. वे सरकार को बदनाम करने के लिए देश में अशांति पैदा करना चाहते हैं."

सिंह ने कहा कि 'अग्निपथ' योजना की अवधारणा की कल्पना 1999 के युद्ध के बाद कारगिल समिति के गठन के समय की गई थी. सिंह ने कहा कि भारत के युवाओं और अन्य नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण की मांग पिछले 30 से 40 वर्षों से की जा रही थी. उन्होंने कहा, "पहले कहा जाता था कि प्रशिक्षण एनसीसी के माध्यम से दिया जा सकता है लेकिन सैन्य प्रशिक्षण की मांग हमेशा से थी."

सेना न तो रोजगार एजेंसी है और न ही कंपनी या दुकान: सिंह

उन्होंने कहा कि सेना न तो रोजगार एजेंसी है और न ही कंपनी या दुकान. उन्होंने कहा कि लोग देश की सेवा के लिए अपनी रुचि से सेना में शामिल होते हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या 'अग्निपथ' योजना पर असंतोष उम्मीदवारों को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए भर्ती रैलियों में आने से हतोत्साहित करेगा, पूर्व जनरल ने कहा कि सरकार ने प्रवेश आयु सीमा को 23 वर्ष (एक बार के लिए) कर दिया है क्योंकि कोरोना महामारी के चलते भर्ती दो साल तक नहीं हो सकी थी. 

उन्होंने कहा, "यदि कोई व्यक्ति पहले भर्ती के अवसरों से चूक गया था तो वह अभी भी आवेदन करने के लिए पात्र है. यह एक स्वैच्छिक योजना है और जो भी मानदंड फिट बैठता है वह आवेदन कर सकता है."

बता दें कि 14 जून को घोषित अग्निपथ योजना में साढ़े 17 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को केवल चार साल के लिए भर्ती करने का प्रावधान है, जिसमें से 25 प्रतिशत को 15 और वर्षों तक बनाए रखने का प्रावधान है. हालांकि बाद में सरकार ने 2022 में भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा को 23 वर्ष तक बढ़ा दिया.

उधर, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हैं. युवा इस योजना के प्रति असंतोष व्यक्त करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं. वहीं, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने रविवार को कहा कि 'अग्निपथ' योजना के खिलाफ विरोध, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल किसी को भी नए भर्ती मॉडल के तहत तीनों सेवाओं में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

 

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