‘वंश का चिराग’ यानी बेटा नहीं होने के तानों और लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर एक 25 वर्षीय शादीशुदा महिला ने आत्महत्या कर ली. यह दर्दनाक घटना केज तहसील के उंदरी गांव में सामने आई है. इस घटना के बाद मृतका की तीन छोटी बेटियों के सिर से हमेशा के लिए मां का साया उठ गया.
लातूर जिले के आजरखेड़ा रेणापुर की रहने वाली अरुणा का विवाह 16 अगस्त 2019 को उंदरी निवासी उद्धव ठोंबरे के साथ हुआ था. उद्धव पहले बैंक में नौकरी करता था, लेकिन बाद में उसने नौकरी छोड़कर खेती शुरू कर दी थी. शादी के बाद अरुणा ने तीन बेटियों को जन्म दिया. इनमें राजनंदिनी की उम्र 5 साल है, जबकि आर्या और अपूर्वा 4 साल की जुड़वां बेटियां हैं.
शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न से परेशान महिला ने किया सुसाइड
शिकायत के अनुसार, लगातार तीन बेटियां होने के कारण अरुणा को ससुराल में प्रताड़ित किया जाने लगा. पति उद्धव शराब पीकर उसके साथ मारपीट और गाली गलौज करता था. वहीं सास इंदुबाई और ससुर उत्तम ठोंबरे उसे मानसिक रूप से यह कहकर तोड़ते थे कि उन्हें बेटा चाहिए था और अरुणा ने बेटियां पैदा कर वंश खत्म कर दिया.
अरुणा ने कई बार अपने मायके वालों को इस प्रताड़ना के बारे में बताया था. मायके वालों ने उसे समझाने और हिम्मत देने की कोशिश की, लेकिन हालात नहीं बदले. आखिरकार 10 जनवरी को दोपहर करीब 2 बजे अरुणा ने अपने ही घर में पंखे से साड़ी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली.
पुलिस ने पति समेत ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज किया केस
अरुणा के भाई गोविंद सूर्यवंशी की शिकायत पर युसुफवडगाव पुलिस स्टेशन में पति, सास और ससुर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 108, 115(2), 352 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है. मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक मछिंद्रनाथ शेंडगे के मार्गदर्शन में उपनिरीक्षक भारत बरडे कर रहे हैं.
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