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महायुति में खींचतान! BJP ने चला शिंदे वाला दांव, कम सीटों के बावजूद ठाणे में मांगा मेयर पद

ठाणे नगर निगम में मेयर पद को लेकर महायुति गठबंधन के घटकों के बीच सियासी विवाद उभरा है. बीजेपी ने मांग की है कि मेयर पद पर उन्हें ढाई साल का कार्यकाल दिया जाए, क्योंकि चुनावों में बीजेपी ने मजबूती से प्रदर्शन कर गठबंधन की जीत में अहम भूमिका निभाई है.

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महायुति में ठाणे मेयर पद को लेकर मतभेद (Photo: Reuters)
महायुति में ठाणे मेयर पद को लेकर मतभेद (Photo: Reuters)

महाराष्ट्र के ठाणे नगर निगम में मेयर पद को लेकर महायुति के घटकों के बीच सियासी खींचतान उभर कर सामने आ गई है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस मामले में अपनी साफ मांग रखी है कि यदि महायुति गठबंधन की सरकार नगर निगम में चलानी है, तो मेयर पद पर भी बीजेपी को ढाई साल का कार्यकाल दिया जाना चाहिए. 

बीजेपी का तर्क है कि ठाणे नगर निगम चुनावों में पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया है और गठबंधन की जीत में उसकी अहम भूमिका रही है, इसलिए सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी मिलना स्वाभाविक है.

मेयर पद पर दांव-पेच की सियासत मजेदार चल रही है. ठाणे में बीजेपी के वहां के विधायक कह रहे हैं कि बीजेपी के पास 28 सीटें हैं और शिवसेना के पास 71 सीटें हैं. इसके बावजूद बीजेपी कह रही है कि हमें भी ढाई-ढाई साल चाहिए. शिंदे गुट के शिवसेना के पास पूरा बहुमत है, लेकिन फिर भी गठबंधन में बीजेपी यह मांग कर रही है. 

मुंबई में जिस तरह एकनाथ शिंदे की शिवसेना दांव खेल रही है, उसी को पलटने की कोशिश बीजेपी ठाणे में कर रही है. ठाणे में कुल 131 सीटें हैं. इनमें से बीजेपी ने 28 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि शिवसेना ने 71 सीटें जीत लिया है. ऐसे में ठाणे में शिवसेना का मेयर आरामदायक बहुमत के साथ बैठता नजर आ रहा है.

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इसके बावजूद अगर बीजेपी ठाणे में मेयर पद की मांग कर रही है, तो कहीं न कहीं बीजेपी भी दांव पलटने की कोशिश करती दिख रही है. बीजेपी के नेता खुलकर यह मांग करते नजर आ रहे हैं. अब देखना यह होगा कि शिवसेना इस पर किस तरह से प्रतिक्रिया देती है.

बीजेपी का यह भी कहना है कि मेयर पद केवल एक प्रतीकात्मक पद नहीं है, बल्कि यह शहर के प्रशासन और विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण पद है. इसलिए, गठबंधन के सभी सहयोगी दलों को एक-दूसरे के जनादेश का सम्मान करते हुए संतुलित नेतृत्व उपलब्ध कराना चाहिए.

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