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महाराष्ट्रः सोलापुर में 613 छात्र संक्रमित, माता-पिता परेशान, प्रशासन- चिंता की बात नहीं

एक पिता का कहना है कि यह अपने आप में प्रशासन के रुख के विपरीत है, एक तरफ आप व्यापारी समुदाय को बता रहे हैं कि कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है और इसलिए दुकानों को बंद करने की आवश्यकता है लेकिन दूसरी ओर स्कूलों ने फिर से खोल दिया गया.

सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रशासन को स्कूलों को फिर से शुरू नहीं करना चाहिए थाः पिता
  • छात्रों में संक्रमण के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराऊंगाः पिता
  • संक्रमण की खबर से चिंता करने की जरूरत नहींः अधिकारी

कोरोना के मामले कम होते ही कई राज्यों में स्कूल के खोले जाने को लेकर फैसले लिए जाने लगे. महाराष्ट्र भी उन राज्यों में है जहां स्कूल खोल दिए गए, लेकिन सोलापुर में 613 छात्रों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद माता-पिता बेहद चिंतित हो गए हैं. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, कक्षाएं जारी रहेंगी.

12 जुलाई से, महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में जिला परिषद स्कूलों के 8वीं से 12वीं कक्षा के लिए ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने के लिए दिशा-निर्देश पारित किया था. इसके साथ ही संबंधित जिलों के जिला पंचायत सीईओ ने केवल उन स्कूलों में कक्षाएं शुरू करने की योजना बनाई जहां एक महीने में कोरोना पॉजिटिव के मामले शून्य रहे.

लेकिन 29 जुलाई को, सोलापुर जिले में 613 छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए. इसने लोगों को चिंता में डाल दिया क्योंकि जैसे ही ऑफलाइन कक्षाएं शुरू की गईं, इस जिले में बड़ी संख्या में छात्र संक्रमित हो गए.

प्रशासन का हास्यास्पद फैसला! 

सोलापुर जिला प्रशासन ने जिले में 8वीं से 12वीं कक्षा की कक्षाएं फिर से खोल दी. लेकिन सोलापुर में 613 छात्रों में कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट आ गई. एक पिता विजय रणदीव ने छात्रों की बड़ी संख्या में छात्रों के संक्रमित होने पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा, "मुझे लगता है कि जिला प्रशासन को स्कूलों को फिर से शुरू नहीं करना चाहिए था. यह हास्यास्पद है कि व्यवसाय के एक तरफ, दुकानों को कोरोना प्रतिबंधों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाता है, व्यावसायिक गतिविधि को शाम 4 बजे के बाद सख्ती से बंद कर दिया जाता है."

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एक अन्य अभिभावक ने भी व्यक्तिगत रूप से कक्षाएं शुरू करने के फैसले पर दुख व्यक्त किया. दत्ता मास्के ने आजतक से बात करते हुए कहा कि यह अपने आप में प्रशासन के रुख के विपरीत है, एक तरफ आप व्यापारी समुदाय को बता रहे हैं कि कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है और इसलिए दुकानों को बंद करने की आवश्यकता है लेकिन दूसरी ओर स्कूलों को फिर से खोल दिया गया. मैं पूरी तरह से छात्रों में फैले संक्रमण के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराऊंगा.

इसके अलावा, छात्र भी चिंतित हैं और हर तरफ से सुझाव आ रहे हैं, जिला प्रशासन से कहा जा रहा है कि जब तक सोलापुर 100% कोरोना मुक्त न हो जाए या जिले में टीकाकरण पूरा न हो जाए तब तक कक्षाएं शुरू नहीं की जाए. अभिभावकों की ओर से शिक्षा विभाग से सवाल किया जा रहा है कि अगर छात्रों के बीच पॉजिटिव केस तेजी से बढ़ते हैं तो क्या जिला प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेगा.

चिंतित माता-पिता को शांत करने की कोशिश करते हुए, जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय  बोरामनी गांव के एक स्कूल के प्रिंसिपल दत्तात्रेय मारुति शिंदे ने बताया कि इस जिले में स्कूलों को फिर से शुरू करने की परियोजना राज्य शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार शुरू की गई थी. इसके बाद सोलापुर के जिला परिषद सीईओ दिलीप स्वामी सबेब ने जिले भर के स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं संचालित करने का कार्यक्रम तैयार किया.

उन्होंने कहा कि राज्य भर के सभी स्कूल पिछले 18 महीनों से लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण बंद कर दिए गए थे, ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की गई थीं, लेकिन ऑनलाइन के माध्यम से ऐसा करते समय, विशेष रूप से ग्रामीण महाराष्ट्र में कई छात्र कनेक्ट नहीं हो सके क्योंकि वे स्मार्टफोन और वाई-फाई का खर्च नहीं उठा सकते थे. उन लोगों को शिक्षा प्रदान की जा सके जो ऑनलाइन कक्षाओं से नहीं जुड़ सके थे. ऐसे 8 से 10 छात्रों के समूह में बुलाकर बरामदे या मंदिर परिसर में शिक्षण कक्षाएं संचालित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए गए. दत्तात्रेय ने जोर देकर कहा कि शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से कक्षाएं लेते समय मास्क पहनना, सैनिटाइज़र का उपयोग, साबुन से हाथ धोना जैसे कोरोना प्रतिबंधों का पालन करने के प्रयास किए.

छात्र बहुत खुश होते हैंः प्रधानाचार्य दत्तात्रेय
प्रधानाचार्य दत्तात्रेय मारुति शिंदे ने बताया कि व्यक्तिगत रूप से पढ़ाते समय न केवल छात्र खुश होते हैं, बल्कि शिक्षक भी बहुत खुश होते हैं क्योंकि वे इतने लंबे अंतराल के बाद छात्रों को देखने में सक्षम होते हैं, शिक्षक के साथ-साथ छात्र भी एक-दूसरे से मिलकर खुशी से झूम उठते हैं.

सोलापुर के परिषद सीईओ दिलीप स्वामी ने आजतक से बात करते हुए कहा कि 613 छात्रों के संक्रमित होने को लेकर चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि वर्तमान में केवल 87 छात्र ही सक्रिय कोरोना रोगी हैं और अधिकांश बच्चे एस्पटोमैटिक ही हैं और लंबे समय से उनका इलाज किया जा चुका है. ऑफलाइन कक्षाएं केवल उन्हीं जिला परिषद विद्यालयों में संचालित की जाती हैं जहां पिछले एक माह से कोई कोरोना पॉजिटिव नहीं हुआ.

चिंता करने की कोई जरूरत नहींः निगरानी अधिकारी 
आजतक से बात करते हुए महाराष्ट्र के राज्य स्वास्थ्य विभाग के राज्य निगरानी अधिकारी (State surveillance officer) डॉक्टर प्रदीप अवाटे ने बताया कि 613 छात्रों के संक्रमित होने की खबर से घबराने या चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. 

उन्होंने कहा कि यदि हम प्रत्येक जिले में पॉजिटिव मामलों के रिकॉर्ड पर जाएं तो हमें पता चलेगा कि कुल कोरोना पॉजिटिव मामलों में से 10% केस में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं. सोलापुर में अब तक 4,471 एक्टिव केस हैं. इसका मतलब है कि 10% ऐसे बच्चे हैं जो संक्रमित हुए हैं, यानी कि 447 छात्र पॉजिटिव हुए. इसी तरह पुणे जिले में कुल 16,001 एक्टिव केस हैं, जिसका अर्थ है कि 10% यानी 18 वर्ष से कम आयु के 1,600 बच्चे संक्रमित हैं.

 

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