महाराष्ट्र में इस साल दही हांडी उत्सव में बनने वाले मानव पिरामिडों में 18 साल से कम के बच्चे हिस्सा नहीं ले सकेंगे. दही हांडी की ऊंचाई भी 20 फीट से ज़्यादा नहीं होगी. जन्माष्टमी के मौके पर होने वाले इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में आए बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को जारी रखने का आदेश दिया है.
2014 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दही हांडी के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए इसमें 18 साल से कम के बच्चों की भागीदारी पर रोक लगा दी थी. हाई कोर्ट ने दही हांडी पर बनने वाले मानव पिरामिड की ऊंचाई भी 20 फ़ीट से ज़्यादा न रखने का आदेश दिया था. इसी आदेश को इस बार भी सुप्रीम कोर्ट ने जारी रखने को कहा है.
2014 में ही दही हांडी आयोजकों की याचिका को सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फ़िलहाल हाई कोर्ट का वही आदेश लागू रहेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मसले पर अक्टूबर के महीने में विस्तार से सुनवाई होगी. इसके साथ ही ये साफ़ हो गया है कि आयोजकों को 2014 में मिली राहत अब बरकरार नहीं है. उन्हें हाई कोर्ट के आदेश का पालन करना ही होगा.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है जिसमें आयोजकों से पुलिस थाने में जाकर बच्चों की उम्र की पुष्टि कराने को कहा गया था. सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार के वकील ने कहा कि भगवान कृष्ण बचपन में मक्खन की हांडी उतारते थे। इसलिए 12 साल से ज़्यादा के बच्चों को दही हांडी में हिस्सा लेने दिया जाता है.
इस पर दो जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस अनिल दवे ने कहा, 'भगवान कृष्ण इस तरह के करतब नहीं दिखाते थे। बच्चों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती.'
महाराष्ट्र सरकार की तरफ से दलील दी गयी की दही हांडी उत्सव से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव है और क्योंकि कृष्ण बचपन में मटके से दही चुरा कर खाते थे इसलिए मानव पिरामिड में छोटे बच्चों के हिस्सा लेने का चलन है और इसकी इजाज़त दी जाए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आयोजनों में होने वाली दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इजाज़त नहीं दी.
दरअसल महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले पर स्पष्टीकरण के लिए ये याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगायी थी जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब ये अंतरिम निर्णय दिया है. सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका डालने वाली स्वाति सयाजी पाटिल और हाई कोर्ट लीगल ऐड के वकील नितेश एस नेव्शे का भी पक्ष सुप्रीम कोर्ट ने लिया.
दोनों की तरफ से ये कहा गया की दही हांडी आयोजक 2014 के बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन कर रहे हैं. इसी लिए स्वाति ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कोर्ट के आदेश की अवमनना की याचिका भी डाली है। दोनों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया की दही हांड़ी के आयोजन में हर साल सैकड़ों लोग घायल होते हैं और कुछ की मौत भी हो जाती है इसलिए हाई कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन होना चाहिए.
अब सुप्रीम कोर्ट अक्टूबर में इस मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा.