महाराष्ट्र सरकार ने जन्माष्टमी पर दही हांडी उत्सव में मानव पिरामिड निर्माण में 18 साल से कम उम्र के बच्चे भाग ले सकते हैं या नहीं, साथ ही मानव पिरामिड की ऊंचाई पर भी सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है. महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट में अर्जी लगाकर सुप्रीम कोर्ट से स्थिति साफ करने की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट इस अर्जी पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा.
दरअसल, 29 जुलाई को बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया था की वो सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण ले. हाई कोर्ट, स्वाति पाटिल नाम की महिला की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें कहा गया है की दही हांडी के आयोजक हाई कोर्ट के अगस्त 2014 के फैसले का उल्लंघन कर रहे हैं जिसमें कहा गया था की दही हांडी की ऊंचाई 20 फीट से ज्यादा नहीं हो सकती. साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने 11अगस्त 2014 में अपने आदेश में कहा था की दही हांडी उत्सव में मानव पिरामिड बनाने में 18 साल से कम उम्र के बच्चे हिस्सा नहीं ले सकते हैं और पिरामिड की ऊंचाई 20 फीट से ज्यादा नहीं हो सकती.
बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उत्सव आयोजकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त 2014 को अंतरिम फैसला सुनाया था जिसमें कहा गया था कि दही हांडी उत्सव में मानव पिरामिड के निर्माण में 12 साल से कम उम्र के बच्चों को हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी. लेकिन पिरामिड की ऊंचाई को लेकर कोई सीमा नहीं तय की गई थी. याचिका पर कोई विस्तृत सुनवाई नहीं हो पाई थी. दही हांडी का उत्सव हर साल भगवान कृष्ण के जन्मदिन जन्माष्टमी के मौके पर आयोजित होता है. इसमें मानव पिरामिड बनाए जाते हैं और ऊंचाई पर बंधे दही से भरे मिट्टी के बर्तन को तोड़ा जाता है. यह महाराष्ट्र का एक बेहद लोकप्रिय उत्सव है.