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महाराष्ट्र: सीबीआई कोर्ट से खारिज हुई सचिन वाझे की जमानत याचिका, अनिल देशमुख को भी राहत नहीं

सीबीआई ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 306 (4) (बी) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि माफी मिलने वाले को मुकदमे की समाप्ति तक हिरासत में रखा जाएगा जब तक कि पहले से ही जमानत पर न हो. आरोपी न्यायिक हिरासत में है और इसलिए यह तर्क खारिज किए जाने का हकदार है.

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सचिन वाझे. -फाइल फोटो सचिन वाझे. -फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सचिन वाझे को बनाया गया है सरकारी गवाह
  • 2 जून को देशमुख के खिलाफ दाखिल की गई थी चार्जशीट

मुंबई की एक विशेष अदालत ने मुंबई के पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को जमानत देने से इनकार कर दिया है. सचिन वाझे ने सीबीआई की ओर से चार्जशीट नहीं दाखिल किए जाने का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी. 

बता दें कि सीबीआई कोर्ट ने वाझे को इस शर्त पर माफी दी थी कि जब जब महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ मुकदमा शुरू होगा तो वह अदालत के सामने पूरा खुलासा करेंगे. सीबीआई ने 2 जून को देशमुख और उनके दो सहयोगियों संजीव पलांडे और कुंदन शिंदे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. हालांकि, सचिन वाझे के सरकारी गवाह बन जाने के बाद उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं किया गया था. 

सीबीआई ने वाझे की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा...

सीबीआई ने भी वाझे की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अपने दो पेज के जवाब में कहा था कि वाझे को 1 जून को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की 306 के तहत माफी दी गई है. वाझे को धारा 306 (4) सीआरपीसी (बी) के तहत न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और उसका नाम 2 जून को दायर चार्जशीट में अभियुक्ति की सूची में नहीं था. 

उधर, देशमुख, पलांडे और शिंदे ने यह कहते हुए डिफ़ॉल्ट जमानत याचिका दायर की थी कि चूंकि सीबीआई की ओर से आरोपपत्र के केवल 59 पृष्ठ दायर किए गए हैं, इसलिए अधूरी चार्जशीट के आलोक में उन्हें जमानत दी जानी चाहिए. दूसरी ओर, सीबीआई ने यह कहते हुए आवेदन का विरोध किया कि उनके द्वारा दायर किया गया आरोप पत्र पूरा हो गया था और उन्हें अदालत द्वारा अतिरिक्त समय दिया गया था ताकि वे दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें जो उन्होंने किया है.

इस बीच, देशमुख की कानूनी टीम, अधिवक्ता अनिकेत निकम और इंद्रपाल सिंह ने डिफ़ॉल्ट जमानत याचिका की सुनवाई के लिए विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष एक और स्थगन की मांग की. देशमुख के निजी सहायक कुंदन शिंदे के वकील सुधा द्विवेदी और अभिषेक मोरे ने भी स्थगन और उस पर लंबी तारीख की मांग की.

इस पर स्पेशल जज एसएच ग्वालानी ने आवेदनों को देखते हुए कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (2) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए इतनी लंबी अवधि नहीं दी जा सकती, हालांकि कल तक का समय दिया जाता है.

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