scorecardresearch
 

'लगा मेरे डॉक्टर ने भी बदली ली पार्टी...', मजाकिया अंदाज में बोले राज ठाकरे, सुनाया भाई उद्धव से जुड़ा किस्सा

राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की अवसरवादी राजनीतिक पर तीखा व्यंग्य किया है. इसी दौरान उन्होंने पोस्ट-इलेक्शन माहौल पर कटाक्ष करते हुए एक मजेदार किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर लोग लोटपोट  हो गए. इस किस्से में उन्होंने अपने भाई उद्धव ठाकरे का भी जिक्र किया था.

Advertisement
X

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने हालिया अवसरवादी राजनीति पर कटाक्ष करते हुए एक मजेदार किस्सा सुनाया, जिसमें उन्होंने अपने भाई उद्धव ठाकरे और परिवार के डॉक्टर यादव का जिक्र किया. उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की विरासत और मराठी अस्मिता पर गहरा दर्द व्यक्त किया और वर्तमान राजनीति की घटिया स्थिति पर चिंता जताई. राज ठाकरे ने बताया कि कैसे राजनीति में सिद्धांत और वफादारी खत्म हो गई है और आज के दौर में सब कुछ बिकाऊ हो गया है.

बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी वर्ष पर शुक्रवार को आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की हालिया अवसरवादी राजनीति पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा, 'चुनाव  से पहले उद्धव भाई बीमार थे, लेकिन अब स्थिति पलट गई है. अब मैं ही ‘अंडर द वेदर’ (बीमार) हो गया हूं.'

इसके बाद राज ने अपने परिवार के डॉक्टर यादव का जिक्र किया और मजाकिया अंदाज में स्पष्ट किया, नाम सुनकर लगता है उत्तर भारतीय होंगे, लेकिन नहीं- वे पूरे मराठी हैं!

'मेरे डॉक्टर ने भी बदली पार्टी'

उन्होंने आगे किस्सा सुनाते हुए कहा, 'मैंने इसी डॉक्टर यादव को उद्धव ठाकरे की सिफारिश की थी. महज दो दिनों में उद्धव पूरी तरह ठीक हो गए, लेकिन मैं वही दवा एक हफ्ते से ले रहा हूं, कोई फर्क नहीं पड़ रहा.' यहां उन्होंने पंचलाइन दी, 'मुझे लगता है कि मेरा डॉक्टर भी 'जंप शिप' कर गया है- पार्टी बदल ली है!'

Advertisement

उन्होंने ये टिप्पणियां अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पांच पार्षदों द्वारा ठाणे जिले के कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (KDMC) में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने के दो दिन बाद की हैं.

आज घटिया हो गई है राजनीति :राज

मनसे प्रमुख ने आगे भावुक होते हुए कहा, 'उन्हें अच्छा लगता है कि बालासाहेब को आज की राजनीति का तरीका नहीं देखा पड़ा. आज राजनीति इतनी घटिया और घिनौनी हो गई है. लोग 'चौड़ी' (चौराहे) पर बेवकूफ बनाया जा रहा है. सिद्धांत, वफादारी, मूल्य- सब कुछ बिकाऊ हो गया है. बालासाहेब को ये सब देखना पड़ता तो उन्हें बहुत दुख होता.'

भाषण के दौरान राज ठाकरे ने बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष की शुरुआत पर अपने एक्स (ट्विटर) पर लिखे गए पोस्ट को भी पढ़कर सुनाया. इस पोस्ट में उन्होंने बालासाहेब की विरासत, मराठी अस्मिता और आज की अवसरवादी राजनीति पर गहरा दर्द जाहिर किया था.

उन्होंने दोहराया कि बालासाहेब के समय में सत्ता की लालसा नहीं थी, समझौते सिद्धांतों से नहीं होते थे और मराठी लोगों के प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ.

'आज आसानी से बिक जाती है निष्ठा'

वहीं, शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की 100वीं जयंती पर एक्स पर पोस्ट साझा कर राज ठाकरे ने कहा, 'आज निष्ठाएं आसानी से बिक जाती हैं. सिद्धांतों को लापरवाही से त्याग दिया जाता है और राजनीति पूरी तरह से अवसरवादी हो गई है. आज की राजनीति में सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि किन मुद्दों को प्रमुखता दी गई, या क्षेत्रीय और भाषाई पहचान को कितनी मजबूती से जीवित रखा गया, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि चुनावी राजनीति में कितनी सफलता हासिल की गई और वहां तक पहुंचने के लिए कौन से हथकंडे अपनाए गए.'

Advertisement

MNS प्रमुख ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, 'बालासाहेब के समय में ऐसी अपेक्षाओं से कोई समझौता नहीं होता था... खुद बालासाहेब को सत्ता की कोई लालसा नहीं थी... यहां तक कि जब बालासाहेब को कभी-कभी राजनीति में लचीला रुख अपनाना पड़ा, तब भी मराठी लोगों के प्रति उनका प्रेम जरा भी कम नहीं हुआ; बल्कि इसके विपरीत, ये और भी मजबूत हो गया. यही वो मूल्य हैं जो उन्होंने हमें सिखाए हैं. जो हममें समाहित हैं.'

'स्वार्थ के लिए बदलूंगा'

उन्होंने आगे कहा, 'मैं आज एक बार फिर ये वादा करता हूं कि इस पूरी तरह बदल चुकी राजनीति में अगर मैं थोड़ा लचीला रुख अपनाता भी हूं तो ये कभी-भी मेरे व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थी हितों के लिए नहीं होगा.'

राज ने बाल ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा,  'बालासाहेब का मराठी भाषा, मराठी प्रांत और मराठी लोगों के प्रति अटूट प्रेम देखकर हजारों-लाखों लोग उनसे जुड़ गए और मैं भी उनमें से एक हूं. इसलिए बालासाहेब और मराठी इन दो शब्दों के प्रति मेरी और मेरे महाराष्ट्र सैनिकों की आस्था कभी कम नहीं होगा है.'

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement