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Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र में विधानसभा भंग हुई तो क्या होगा? नहीं हुई तो क्या होगा? समझें

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र का सियासी संकट गहराता जा रहा है. शिवसेना के एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी है. इसी बीच शिवसेना संजय राउत ने विधानसभा भंग होने का इशारा भी कर दिया है. लेकिन क्या होगा अगर राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश मान ली तो? और नहीं मानी तो क्या होगा? समझें...

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एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद उद्धव सरकार संकट में आ गई है. (फाइल फोटो-PTI) एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद उद्धव सरकार संकट में आ गई है. (फाइल फोटो-PTI)
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • विधानसभा भंग हुई तो फिर से चुनाव होंगे
  • नहीं हुई तो बीजेपी बना सकती है सरकार
  • सरकार बनाने के लिए 144 सीटें जरूरी

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र का सियासी संकट बढ़ता जा रहा है. ये सियासी संकट तब खड़ा हुआ, जब शिवसेना विधायक और मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बगावत का बिगुल फूंक दिया. एकनाथ शिंदे सोमवार रात को करीब दो दर्जन विधायकों के साथ गुजरात के सूरत शहर में एक होटल में चले गए. बाद में सभी बागी विधायकों को असम के गुवाहाटी ले जाया गया. इस बीच शिंदे ने अपने साथ 40 विधायकों के होने का दावा किया है. वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने सियासी संकट के बीच विधानसभा भंग होने के संकेत दिए हैं.

दरअसल, 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी की सरकार है. गठबंधन सरकार में सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन सोमवार रात को एकनाथ शिंदे ने अचानक बागी तेवर अपना लिए. बुधवार सुबह सभी बागी विधायक गुवाहाटी के एक होटल में चले गए हैं. 

गुवाहाटी पहुंचे एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि उनके साथ 40 विधायक हैं. उन्होंने ये भी दावा किया कि जल्द ही और 10 विधायक भी उनके साथ आएंगे. शिंदे बगावत कर चुके हैं और शिवसेना की मानने को तैयार नहीं हैं. गहराते सियासी संकट के बीच शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि महाराष्ट्र में मौजूदा राजनीतिक हालात विधानसभा भंग होने की ओर बढ़ रहे हैं. 

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क्या होगा अगर महाराष्ट्र में विधानसभा भंग कर दी जाती है? संवैधानिक तौर पर क्या कुछ हो सकता है? और राजनीतिक तौर पर क्या कुछ हो सकता है? समझें सारी स्थिति....

अगर राज्यपाल ने सिफारिश मानी तो...

- संवैधानिक तौर पर क्या हो सकता है?: अगर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी विधानसभा भंग करने की कैबिनेट की सिफारिश को मान लेते हैं तो विधानसभा भंग कर दी जाएगी. अगले 6 महीने में यहां दोबारा चुनाव कराने होंगे.

- राजनीतिक तौर पर क्या हो सकता है?: दोबारा विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे. हो सकता है कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ेंगे. जबकि, बीजेपी शिवसेना के बागी नेताओं के साथ मिलकर चुनाव में उतर सकती है.

अगर राज्यपाल ने सिफारिश ठुकराई तो...

- संवैधानिक तौर पर क्या हो सकता है?: राज्यपाल को संदेह होता है कि सरकार अब बहुमत में नहीं है तो वो सरकार को सदन में अपना बहुमत साबित करना होगा. अगर फ्लोर टेस्ट नहीं होता है तो राज्यपाल बीजेपी को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं, लेकिन ये तभी होगा जब बीजेपी के पास कम से कम 143 विधायकों के समर्थन वाला लेटर होगा.

- राजनीतिक तौर पर क्या हो सकता है?: हो सकता है कि बीजेपी शिवसेना के बागी विधायकों के साथ मिलकर अपनी सरकार बना ले. इसके बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस विपक्ष में बैठ सकती है.

लेकिन राज्यपाल तो कोविड पॉजिटिव हैं?

- महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी कोरोना संक्रमित हो गए हैं. उन्हें मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ऐसे में पूरे संकट का हल कैसे निकलेगा? क्योंकि सियासी संकट में राज्यपाल की भूमिका अहम हो जाती है.

- इस बारे में संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप बताते हैं कि राज्यपाल कैबिनेट की सिफारिश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं. राज्यपाल विधानसभा का सत्र बुलाकर मुख्यमंत्री को सदन में बहुमत साबित करने को कह सकते हैं. अगर मुख्यमंत्री बहुमत साबित नहीं कर पाए, तो फिर विधानसभा को कुछ समय के लिए निलंबित कर नई सरकार बनाने की संभावनाओं को तलाशा जाएगा.

- सुभाष कश्यप बताते हैं कि राज्यपाल अभी कोरोना संक्रमित हैं तो केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति किसी दूसरे व्यक्ति को महाराष्ट्र के राज्यपाल का दायित्व सौंप सकते हैं. 

- वो ये भी बताते हैं कि चूंकि राष्ट्रपति चुनाव होने हैं, ऐसे में तब तक विधानसभा को निलंबित किया जा सकता है. हो सकता है कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही विधानसभा पर कुछ फैसला हो. अगर विधानसभा निलंबित रहती है तो विधायक राष्ट्रपति चुनाव में वोट कर सकते हैं, लेकिन भंग होने की स्थिति में विधायक वोट नहीं डाल पाएंगे. 

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महाराष्ट्र विधानसभा का गणित क्या है?

- महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं. शिवसेना विधायक रमेश लटके के निधन से एक सीट खाली है. मतलब, अभी विधानसभा में कुल 287 सीटें हैं. किसी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने या बचाने के लिए 144 सीटों की जरूरत है.

- विधानसभा में बीजेपी के पास 106 विधायक हैं. उसके पास 6 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है. यानी कुल 112 विधायक एनडीए के पास है. जबकि, शिवसेना के 55, एनसीपी के 53 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं. इस तरह महाविकास अघाड़ी के पास अभी कुल 153 विधायकों का समर्थन है. 

- अगर शिवसेना के 40 बागी विधायक बीजेपी के पास जाते हैं, तो उसके पास सदन में कुल 152 विधायकों का समर्थन हो जाएगा, जबकि महाविकास अघाड़ी के पास 113 विधायक बचेंगे. इससे महाविकास अघाड़ी की सरकार गिर जाएगी और एनडीए सत्ता में आ जाएगा.

महाराष्ट्र जैसा सियासी संकट पहले कब-कब हुआ?

- कर्नाटकः मई 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे. तब बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी, लेकिन बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था. बाद में कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई. हालांकि, एक साल बाद ही जुलाई 2019 में जेडीएस के विधायक बागी हो गए. बगावत के कारण कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिर गई और बीजेपी की सरकार बन गई.

- मध्य प्रदेशः दिसंबर 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बाद में कांग्रेस ने निर्दलीय और दूसरी पार्टियों के विधायकों के समर्थन से सरकार बना ली. कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गए. ये सरकार 13 महीने बाद तब गिर गई, जब कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत कर दी और विधायकों को तोड़ दिया. ये सारे विधायक बाद में बीजेपी में आ गए और मध्य प्रदेश में दोबारा शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार आ गई. 

 

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