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कोरोना: मुंबई में पार्किंग स्पेस, स्टेडियम, साइंस सेंटर को बना रहे क्वारनटीन-अस्पताल

मुंबई कोरोना वायरस त्रासदी से जूझ रहा है. महालक्ष्मी रेसकोर्स पार्किंग स्पेस को क्वारनटीन-अस्पताल सेंटर में बदला जा रहा है. मुंबई में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के लिए अस्पताल मौजूद नहीं हैं. इसलिए अब बीएमसी की ओर से खुली जगहों में अस्पतालों और क्वारनटीन सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है.

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मुंबई में लगातार बनाए जा रहे हैं कोविड-19 क्वारनटीन सेंटर (तस्वीर- समीर शानबाग)
मुंबई में लगातार बनाए जा रहे हैं कोविड-19 क्वारनटीन सेंटर (तस्वीर- समीर शानबाग)

  • महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रहे हैं संक्रमण के केस
  • खुली जगहों पर बनाए जा रहे क्वारनटीन सेंटर
कोरोनावायरस महामारी की वजह से मुंबई अपनी सबसे खराब स्थिति की तैयारी कर रहा है. महानगर में कोरोना वायरस केसों का आंकड़ा 10 हजार को पार कर चुका है. बीएमसी का अनुमान है कि सबसे खराब स्थिति में यह आंकड़ा 80 हजार तक जा सकता है.

मुंबई में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के लिए अस्पताल मौजूद नहीं हैं. इसलिए अब बीएमसी की ओर से खुली जगहों में अस्पतालों और क्वारनटीन सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है.

महालक्ष्मी रेसकोर्स पार्किंग स्पेस को क्वारनटीन-अस्पताल सेंटर में बदला जा रहा है. अब इन सुविधाओं के निर्माण में कौन लगे लोग हुए हैं, क्या अनुमान लगा सकते हैं. उनमें से अधिकतर प्रवासी मजदूर हैं.

महालक्ष्मी रेसकोर्स पार्किंग स्पेस से लेकर वर्ली के NSCI डोम स्टेडियम, प्रसिद्ध नेहरू साइंस सेंटर तक को Covid-19 फैसिलिटी में तब्दील किया जा रहा है. आजतक/इंडिया टुडे ने ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर इन सुविधाओं का जायज़ा लिया.

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1. महालक्ष्मी रेसकोर्स पार्किंग स्पेस

क्षमता-325 बेड (क्वारनटीन और अस्पताल सुविधा दोनों)

महालक्ष्मी रेसकोर्स पार्किंग स्पेस में 325 बेड होंगे. यहां नजर आ रहा ढांचा सिर्फ दो दिन में तैयार किया गया. 325 बेड समेत पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर यहां रिकार्ड 6 दिन में तैयार किया जाएगा. एक हफ्ते में इसका इस्तेमाल मरीजों के लिए किया जाने लगेगा. क्योंकि गर्मी के दिन हैं, इसलिए यहां कूलर लगाए जा रहे हैं. पर्याप्त संख्या में टॉयलेट्स भी बनाए जा रहे हैं.

mumbai-1_050720092507.jpgखाली जगहों पर बनाए जा रहे क्वारनटीन सेंटर

यहां ढांचे के निर्माण में लगे कुछ प्रवासी मजदूरों से आजतक/इंडिया टुडे ने बात की. इनमें से ज्यादातर बिहार और यूपी के दिहाड़ी मजदूर हैं. सभी कहते हैं कि पिछले दो महीनों से उन्हें कोई काम नहीं मिला है. वो अपने गृह राज्यों में वापस जाना चाहते हैं. इसके लिए वो आवेदन भी कर चुके हैं. हालांकि ये मजदूर मानते हैं कि उनके उनके गांवों में भी स्थिति अच्छी नहीं होगी. एक मजदूर ने कहा,यहां भी मरना है और वहां भी, इसलिए बेहतर है कि घर पर जाकर ही मरें.

निर्माण में लगे कुछ प्रवासी मजदूरों ने संतोष जताया कि कम से कम कुछ काम मिला है और वे कुछ पैसा और खाना जुटा पाएंगे. हालांकि वो साथ ही कहते हैं कि ये अस्थायी व्यवस्था है. बीएमसी की ओर से इन मजदूरों को खाना और पानी मुहैया कराया जा रहा है.

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2. NSCI डोम स्टेडियम, वर्ली

क्षमता- ICU वार्ड सुविधा सहित 600 से अधिक बेड

वर्ली स्थित प्रसिद्ध डोम स्टेडियम अतीत में कई बड़े खेल समारोहों और संगीत कार्यक्रमों का चश्मदीद रह चुका है. अब यह स्थान Covid-19 सुविधा में तब्दील हो चुका. इसके अलावा डोम स्टेडियम के अंदर भी आईसीयू वार्ड है.

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3. नेहरू साइंस सेंटर

क्षमता- Covid-19 मरीजों के लिए 100 से अधिक बेड वाले आइसोलेशन वार्ड

लॉकडाउन से पहले तक सामान्य दिनों में जो पर्यटक मुंबई आते थे तो देखने वाले प्रसिद्ध स्थलों की उनकी सूची में नेहरू साइंस सेंटर का भी शुमार होता था. अब इस जगह को Covid-19 अस्पताल यानि आइसोलेशन वार्ड में बदला जा रहा है.

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बीएमसी के इंजीनियर अमित सोनवणे यहां व्यवस्थाओं की देखरेख कर रहे हैं. यहां मरीजों की भर्ती के लिए 6 दिनों में पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाएगा. यहां Covid-19 मरीजों के लिए 100 से अधिक बेड की क्षमता होगी.पहले इस जगह पर पहले विंटेज कारों को पार्क किया जाता था. अब ये सभी कार यहां से शिफ्ट कर दी गई हैं.

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