महाराष्ट्र में विधान परिषद यानी MLC की 9 खाली सीटों के लिए 13 मई को चुनाव होने हैं. लेकिन इससे पहले ही सियासी खेल शुरू हो गया है. सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के लिए 8 सीटें जीतना लगभग तय माना जा रहा है.
बची हुई एक सीट के लिए विपक्षी गठबंधन MVA यानी महा विकास आघाडी में जबरदस्त उठापटक है. MVA के अंदर यह तय नहीं हो पा रहा कि उम्मीदवार कौन होगा. कांग्रेस ने साफ कह दिया है कि अगर उद्धव ठाकरे उम्मीदवार नहीं बने तो वो अपना रुख बदल सकती है.
MLC चुनाव क्या होता है?
महाराष्ट्र विधान परिषद, राज्य की ऊपरी सदन है. जैसे देश में लोकसभा और राज्यसभा होती है, उसी तरह राज्यों में विधानसभा और विधान परिषद होती है. इस बार विधान परिषद की 9 सीटें खाली हुई हैं और इन्हें भरने के लिए 13 मई को चुनाव होंगे. इन सीटों के लिए वोट आम जनता नहीं डालती, बल्कि विधानसभा के चुने हुए विधायक वोट डालते हैं.
अब महाराष्ट्र विधानसभा में महायुति यानी BJP, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की NCP का बहुमत है. इसलिए गणित साफ है कि 9 में से 8 सीटें महायुति के पास जाएंगी और MVA के लिए सिर्फ एक सीट बचती है.
MVA में एक सीट के लिए क्यों मच रहा है बवाल?
जब सिर्फ एक सीट मिलनी है तो MVA के तीनों दलों यानी कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT और शरद पवार की NCP में से किसी एक को यह सीट देनी होगी. और यहीं से उलझन शुरू होती है.
कांग्रेस ने एक बड़ी शर्त रख दी है. कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने साफ कहा कि वो MVA के उम्मीदवार को तभी समर्थन देंगे जब उम्मीदवार उद्धव ठाकरे हों. अगर उद्धव ठाकरे नहीं आए तो कांग्रेस अपना फैसला बदल सकती है. यानी कांग्रेस ने MVA की एकजुटता को उद्धव ठाकरे के नाम से जोड़ दिया है. यह एक बड़ा दबाव है.
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उद्धव ठाकरे नहीं आए तो कौन होंगे उम्मीदवार?
अगर उद्धव ठाकरे खुद चुनाव लड़ने से मना कर दें तो शिवसेना UBT की तरफ से अंबादास दानवे, सुषमा अंधारे, विनायक राउत, राजन विचारे, वैभव नाईक या सूरज चव्हाण में से कोई एक नाम सामने आ सकता है.
कांग्रेस की तरफ से बालासाहेब थोरात, हर्षवर्धन सपकाल, सचिन सावंत, राजेश राठोड और मुजफ्फर हुसैन के नाम चर्चा में हैं. लेकिन दिक्कत यह है कि जब तक उद्धव ठाकरे का फैसला नहीं आता, बाकी सब कुछ अधर में है.
महायुति की 8 सीटें कैसे बंटेंगी?
महायुति में यह बंटवारा पहले से काफी हद तक तय माना जा रहा है. BJP को 8 में से 6 सीटें मिलेंगी. शिंदे की शिवसेना को 1 सीट और अजित पवार की NCP को 1 सीट मिलेगी.
BJP की तरफ से केशव उपाध्ये, माधवी नाईक, रणजीत सिंह निंबालकर, राम सतपुते, संदीप जोशी, दादाराव केचे और संजय केनेकर के नाम चर्चा में हैं. शिंदे की शिवसेना से नीलम गोरहे का नाम लगभग तय माना जा रहा है. इनके साथ मनीषा कायंदे, शाइना NC और शीतल म्हात्रे भी दावेदार हैं.
अजित पवार की NCP से अमोल मिटकरी, आनंद परांजपे, समीर भुजबल, सूरज चव्हाण, उमेश पाटिल और अनिकेत तातकरे के नाम सामने हैं.
क्या चुनाव बिना लड़ाई के भी हो सकता है, और BJP का बड़ा दांव क्या है?
अगर MVA और महायुति दोनों मिलकर 9 उम्मीदवार तय कर लें और कोई अतिरिक्त उम्मीदवार न हो तो चुनाव बिना वोटिंग के यानी निर्विरोध हो सकता है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक BJP एक बड़ा दांव खेल सकती है. खबर है कि BJP अजित पवार के गुट के जरिए नौवां उम्मीदवार उतार सकती है. इसका मकसद होगा शरद पवार के गुट के विधायकों का वोट तोड़ना.
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यानी महायुति अपनी 8 सीटें पक्की रखते हुए MVA की एकमात्र सीट भी छीनने की कोशिश कर सकती है. अगर ऐसा हुआ तो MVA के हाथ एक भी सीट नहीं आएगी.
यह पूरा मामला 13 मई से पहले और दिलचस्प होता जाएगा. अभी सबकी नजर उद्धव ठाकरे के फैसले पर है कि वो चुनाव लड़ेंगे या नहीं. उनके एक फैसले से MVA की पूरी रणनीति तय होगी.