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महाराष्ट्र: चुनावी बिगुल बजते ही हेलीकॉप्टर और चॉपर की मांग बढ़ी

महाराष्ट्र में चुनावी बिगुल बज चुका है तो नेताओं का दल भी जोर-शोर से प्रचार में जुट गया है. हर बार की तरह इस बार भी प्रचार अभियान में छोटे हेलीकॉप्टर और चॉपर नेताओं की पहली पसंद है.

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संजय गांधी, जीएमसी बालयोगी, वाईएसआर रेड्डी और माधव राव सिंधि‍या
संजय गांधी, जीएमसी बालयोगी, वाईएसआर रेड्डी और माधव राव सिंधि‍या

महाराष्ट्र में चुनावी बिगुल बज चुका है तो नेताओं का दल भी जोर-शोर से प्रचार में जुट गया है. हर बार की तरह इस बार भी प्रचार अभियान में छोटे हेलीकॉप्टर और चॉपर नेताओं की पहली पसंद है. इसके लिए नेताओं ने एविएशन कंपनियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है. चॉपर और हेलीकॉप्टर की सबसे अधिक मांग करने वालों में कांग्रेस, बीजेपी और एनसीपी जैसी पार्टियों के नेता शामिल हैं.

दूसरी ओर, चुनाव प्रचार के दौरान विमान हादसे में कई नेता अपनी जान गवां चुके हैं. बावजूद इसके नेताओं का चॉपर प्रेम उन्हें छोड़ नहीं रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चॉपर से चुनाव प्रचार करना जहां सुविधाजनक है, वहीं यह फैशन के साथ ही स्टेटस सिंबल भी बन गया है. नेता जब प्रचार के दौरान चॉपर या हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं तो जनता में अलग प्रभाव बनता है.

बहरहाल, चुनाव प्रचार के दौरान एयरपोर्ट प्रशासन ने भी अनशेड्यूल्ड चॉपर व जेट एयरक्राफ्ट के लिए हैंगर एरिया मुहैया कराने और उनके संचालन के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है. दूसरी ओर, चॉपर मालिक भी नेताओं की फरमाइश के मुताबिक चॉपर मुहैया कराने में जुट गए हैं. चॉपर मालिक राजीव वाधवा कहते हैं, 'राजनितिक दल के अधि‍कतर लोग बड़ी कैबिन वाले एयरक्राफ्ट को ही प्राथमिकता देते हैं. ऐसे में फाल्कन, हॉकर से लेकर सीजेटू जैसे जेट की मांग अधिक रहती हैं. इनके लिए डेढ़ लाख से लेकर तीन लाख रुपये तक प्रति घंटे तक कीमत चुकानी पड़ती है.

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क्या है रेट कार्ड
ताज एयर एविएशन विंग के मुताबिक, डॉल्फिन एनथ्री और बेल 412 जैसे एयरक्राफ्ट के लिए ढाई लाख रुपये प्रति घंटा चुकाना होता है. बेल 407 के लिए 90 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये. प्राइवेट जेट के लिए 1.60 लाख से 2.25 लाख. हेलीकॉप्टर के लिए 2.25 लाख से 3.25 लाख रुपये चुकाने होते हैं.

राजीव बताते हैं, 'इस समय बेल और अगस्टा हेलीकॉप्टर सबसे ज्यादा डिमांड में हैं. राज्य में लगभग 16 हवाईपट्टियां हैं इसलिए नेता चॉपर से अधिक हेलीकॉप्टर को प्राथमिकता देते हैं. अधिक से अधिक रैलियां करने के लिए राज्य के चारों बड़े दल हवाई माध्यम को प्रिफर करते हैं. अभी शुरुआत है. नामांकन और पर्चे दाखिल किए जाने के बाद बुकिंग की मांग में इजाफा होगा और वोटिंग का दिन नजदीक आएगा, चुनाव प्रचार तेज होता जाएगा.

एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल 15 से 18 हेलिकॉप्टर और 10 से 12 फिक्स विंग एयरक्राफ्ट की मांग रहने का अनुमान है. हालांकि, विमानों के जरिए चुनाव प्रचार के दौरान हादसों का भी इतिहास रह है. इन हादसों के देश ने कई मशहूर और जनसमर्पित नेताओं को खोया है. इनमें वाईएसआर रेड्डी और माधव राव सिंधिया जैसे नेता भी शामिल हैं.

वो जो हमसे जुदा हो गए...
23 जून 1980: दिल्ली में कांग्रेस नेता संजय गांधी की विमान हादसे में मौत.
30 सितम्बर 2001: सीनियर कांग्रेस नेता और कैबिनेट मिनिस्टर माधव राव सिंधि‍या का विमान क्रैश, मौत.
3 मार्च 2002: लोकसभा अध्यक्ष और तेलगु देशम पार्टी के नेता जीएमसी बालयोगी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत.
31 मार्च 2005: हरियाणा के ऊर्जा मंत्री ओपी जिंदल की उत्तर प्रदेश में हेलीकाप्टर हादसे में मौत.
सितम्बर 2004: मेघालय कम्युनिटी के नेता सी संगमा की हेलीकॉप्टर हादसे में मौत.
3 सितम्बर 2009: आंध्र प्रदेश में वाईएसआर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत.

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इसके अलावा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उनके मंत्री प्रताप सिंह बाजवा विमान हादसे में बाल-बाल बचे. पंजाब के उपमुखमंत्री सुखबीर सिंह बादल, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी नेता मुख्तार अब्बस नकवी भी विमान हादसे में बाल-बाल बच चुके हैं.

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