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'मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं...' तिरंगे में लिपटकर घर आया लाड़ला तो बिलख पड़ी मां, रुला देगी ये कहानी

तिरंगे में लिपटे बेटे का पार्थिव शरीर जैसे ही घर पहुंचा, मां बिलख पड़ीं. वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं. असम में सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट हादसे में भारतीय वायुसेना के 28 साल के फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर की जान चली गई थी. उनका पार्थिव शरीर जब नागपुर पहुंचा तो इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. ऑपरेशन सिंदूर में भी हिस्सा ले चुके इस युवा पायलट को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई.

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बेटे की पार्थिव देह पहुंची तो बिलख पड़ीं मां. (Photo: Screengrab)
बेटे की पार्थिव देह पहुंची तो बिलख पड़ीं मां. (Photo: Screengrab)

नागपुर की एक गली में शनिवार को ऐसा सन्नाटा पसरा था, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया था. घर के बाहर लोगों की भीड़ थी, आंखों में आंसू थे और हर किसी के चेहरे पर दर्द था. कुछ ही देर में सेना का वाहन उस घर के सामने आकर रुका, जहां हर दिन एक मां अपने बेटे के लौटने का इंतजार करती थी. लेकिन इस बार 28 साल का बेटा फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर तिरंगे में लिपटकर घर लौटा था.

जैसे ही तिरंगे में लिपटे बेटे का पार्थिव शरीर लाया गया, मां ने देखा तो बिलख पड़ीं. पूर्वेश दुरगकर भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर थे. उनका सपना बचपन से ही आसमान को छूने का था. नागपुर में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें देश की सेवा करनी है और भारतीय वायुसेना में जाना है.

iaf pilot purvesh duragkar mother breaks down as son returns wrapped in tricolour

उनके पिता रविंद्र दुरगकर रेलवे से रिटायर्ड हैं. उनका कहना था कि पूर्वेश ने अपने सपने को पूरा करने के लिए जी-जान लगा दी थी. वह हमेशा अपने साथियों, अपनी यूनिट और वायुसेना के बारे में गर्व से बात करता था. लेकिन किसे पता था कि आसमान में उड़ान भरने वाला यह युवा पायलट इतनी जल्दी सबको छोड़कर चला जाएगा.

फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश की मां ने कहा कि यकीन करना मुश्किल है कि मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं है. नागपुर में अंतिम संस्कार किया गया. पूर्वेश की मां, बहन और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है.

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असम में हुआ था हादसा

गुरुवार को असम के करबी आंगलोंग जिले में भारतीय वायुसेना का सुखोई Su-30 MKI फाइटर जेट उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर और स्क्वाड्रन लीडर अनुज की मौत हो गई. यह विमान जोरहाट एयरबेस से उड़ा था. उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान रडार से गायब हो गया और बाद में उसके दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सामने आई. यह खबर जैसे ही नागपुर में पूर्वेश के घर पहुंची, वहां मातम छा गया.

पिता को आया वह फोन

पूर्वेश के पिता का कहना था कि उन्होंने अपने बेटे से आखिरी बार बुधवार को बात की थी. सब कुछ सामान्य था. लेकिन अगले दिन सुबह फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ से जो खबर मिली, उसने उनकी दुनिया ही बदल दी. पूर्वेश के ग्रुप कैप्टन का फोन था. उन्होंने हादसे की जानकारी दी थी. 

ऑपरेशन सिंदूर में भी निभाई थी जिम्मेदारी

पूर्वेश देश के लिए समर्पित एक सच्चे सैनिक थे. उनके पिता का कहना था कि पूर्वेश ने ऑपरेशन सिंदूर में भी हिस्सा लिया था. यह वही ऑपरेशन था जिसे भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए शुरू किया था. पूर्वेश इस मिशन का हिस्सा रहे थे.

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कुछ दिन पहले ही घर आए थे पूर्वेश

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परिवार के लोगों के अनुसार, पूर्वेश कुछ ही दिन पहले नागपुर आए थे. घर में पारिवारिक मिलन का छोटा सा कार्यक्रम हुआ था. उनकी बहन, जो आईआईटी से पढ़ी हुई हैं और अमेरिका में सेटल हैं, वह भी उस समय घर आई थीं. पूरे परिवार ने साथ समय बिताया. किसी ने भी नहीं सोचा था कि वह मुलाकात आखिरी साबित होगी.

शिवाजी महाराज से प्रेरित थे पूर्वेश

पूर्वेश के पिता बताते हैं कि उनका बेटा छत्रपति शिवाजी महाराज की विचारधारा से बेहद प्रभावित था. वह अक्सर उनके साहस और राष्ट्रभक्ति की बातें किया करता था. देश के लिए कुछ करने की भावना उसके भीतर बचपन से ही थी. 

यह भी पढ़ें: वायुसेना का Su-30 MKI फाइटर जेट क्रैश, दोनों पायलट की मौत

शुक्रवार को पूर्वेश का पार्थिव शरीर पहले दिल्ली लाया गया, जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. इसके बाद नागपुर के सोनगांव एयरफोर्स स्टेशन लाया गया. शनिवार को उनका पार्थिव शरीर उनके घर न्यू सुबेदार लेआउट में परिवार के पास पहुंचा. जैसे ही तिरंगे में लिपटा बेटा घर पहुंचा, वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं.

मां, बहन और पिता अपने बेटे से लिपटकर रोते रहे. यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद वायुसेना के अधिकारी और पूर्वेश के दोस्त भी अपने आंसू नहीं रोक पाए.

'पूर्वेश अमर रहें' के गूंजे नारे

पूर्वेश को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे. लोगों ने पूर्वेश अमर रहें और भारत माता की जय के नारे लगाए. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए नागपुर के मानेवाडा घाट ले जाया गया.

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सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

मानेवाडा घाट पर फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. भारतीय वायुसेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और परंपरा के अनुसार गन सैल्यूट भी दिया गया. इसके बाद उनके पिता रविंद्र दुरगकर ने अपने बेटे के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी. उस पल वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं.

पूर्वेश अभी 28 साल के थे और अविवाहित थे. उनके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था. आज नागपुर का यह युवा पायलट इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी कहानी हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेगी.

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