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स्टेन स्वामी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा - उनका बहुत सम्मान करते हैं

बेंच ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है और हमने भी ऐसा होने की उम्मीद नहीं की थी. बता दें स्टेन स्वामी एल्गार परिषद केस में आरोपी थे. उन्हें पिछले साल गिरफ्तार किया गया था. 5 जुलाई को 84 साल की उम्र में उनका निधन मुंबई के एक हॉस्पिटल में हुआ था.

स्टेन स्वामी का निधन 5 जुलाई को हुआ था. (फाइल फोटो- आजतक) स्टेन स्वामी का निधन 5 जुलाई को हुआ था. (फाइल फोटो- आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • एल्गार परिषद केस में आरोपी थे स्टेन स्वामी
  • 5 जुलाई को मुंबई के अस्पताल में हुआ निधन

स्टेन स्वामी के निधन के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को उनकी याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनएच जमादार की बेंच ने कहा कि स्टेन स्वामी की मौत की खबर सुनकर हमें भी धक्का लगा, जो हुआ हम उसके लिए दुखी हैं. समाज के लिए उनकी सेवा के लिए हमारे मन में स्टेन स्वामी के लिए बहुत सम्मान है.

बेंच ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है और हमने भी ऐसा होने की उम्मीद नहीं की थी. बता दें स्टेन स्वामी एल्गार परिषद केस में आरोपी थे. उन्हें पिछले साल गिरफ्तार किया गया था. 5 जुलाई को 84 साल की उम्र में उनका निधन मुंबई के एक हॉस्पिटल में हुआ था. 

'कोर्ट ने हमेशा उनकी अपील पर विचार किया'

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनएच जमादार की बेंच ने कहा, स्टेन स्वामी की ओर से पेश होने वाली वरिष्ठ वकील मिहीर देसाई ने जब भी कोई अपील की, कोर्ट ने उस पर विचार किया. इतना ही नहीं कोर्ट ने इस मामले में वरवर राव को स्वास्थ्य के आधार पर जमानत देने का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा, कोई ये जिक्र नहीं कर रहा कि हमने वरवर राव को जमानत दी थी. हमने उनके परिवार को अस्पताल में उनसे मिलने की इजाजत दी. 

जस्टिस शिंदे ने कहा, जब मिहीर देसाई आपने स्वामी को जेल से हॉस्पिटल ट्रांसफर करने की अपील की, तो हमने उसे स्वीकार किया. उन्होंने कहा, ना तो हम अपने आदेश में इसका जिक्र कर सकते हैं कि हमें कैसा महसूस हो रहा है, ना ही हम ये बता सकते हैं. 

मैं टीवी नहीं देखता, फिर भी अंतिम संस्कार देखा- जस्टिस शिंदे 

जस्टिस शिंदे ने बताया कि न्यूज चैनल देखने और समाचार पत्र पढ़ने से बचते हैं. लेकिन सोमवार को उन्होंने स्वामी का अंतिम संस्कार देखा. मुझे अंतिम संस्कार का समय पता था, इसलिए मैंने देखा. अंतिम संस्कार काफी सम्मानजनक तरीके और शालीनता के साथ किया गया. 

उनकी सेवा के लिए हमारे मन में सम्मान

जस्टिस शिंदे ने कहा, समाज में उनके काम के लिए हमारे मन में पूरा सम्मान है. कानूनी तौर पर जो कुछ भी हो रहा है वह दूसरी बात है, लेकिन समाज के लिए उनकी सेवा के लिए हमारे मन में बहुत सम्मान है. 

कोर्ट से कोई शिकायत नहीं- देसाई

स्टेन स्वामी के वकील देसाई ने कहा, उन्हें कोर्ट से कोई शिकायत नहीं है. देसाई ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह अपने बयान पर कायम हैं. उन्होंने कहा, वे उन सभी हाईकोर्ट की बेंच से संतुष्ट हैं, जिन्होंने स्वामी के मामलों की सुनवाई की थी. 
 
एनआईए के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रहा था हाईकोर्ट 

बॉम्बे हाईकोर्ट एनआईए स्पेशल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ स्वामी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उनकी बेल को रद्द कर दिया गया था. देसाई ने कोर्ट से मांग की कि स्वामी की हिरासत में मौत के मामले में की जा रही मजिस्ट्रेट जांच में हिस्सा लेने के लिए उनके मित्र फादर फ्रेजर मस्कारेनहासको अनुमति दी जाए. ताकि यह सुनिश्चिचत किया जा सके कि इसकी जांच और रिपोर्ट यह सब कानून और प्रक्रिया के तहत हो. 
 
एनआईए ने किया विरोध

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से पेश वकील संदेश पाटिल ने इसका विरोध किया. उन्होने कहा, करते हुए कहा कि जेल अधिकारियों और एनआईए पर दोष मढ़ने के लिए राहत की मांग की जा रही थी. वहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनआईए को इस मामले में आपत्ति का अधिकार था.  

अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी

कोर्ट ने कहा, हमें बताया गया कि मामले में आरोप भी तय नहीं किए गए हैं. कितने गवाह हैं? आप मामले पर बहस करेंगे और चले जाएंगे. लेकिन हमें जवाब देना होगा. बिना ट्रायल के कितने साल तक लोगों को जेलों में बंद रहने के लिए कहा जा सकता है? जल्दी ट्रायल होना मौलिक अधिकार है. इस मामले में की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी. 

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