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BMC चुनाव में सुरों की राजनीति, मैथिली ठाकुर के हिंदी मराठी गीतों से महायुति का वोट साधने का प्रयास

मुंबई महानगरपालिका चुनाव में सभी दल उत्तर भारतीय और मराठी वोटरों को साधने में जुटे हैं. महायुति ने प्रचार के लिए लोकगायिका मैथिली ठाकुर को उतारा, जिन्होंने हिंदी और मराठी गीत गाए. बदले हुए गठबंधन समीकरणों के बीच 15 जनवरी को मतदान और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे.

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मैथिली ठाकुर ने गया मराठी गाना (Photo: Screengrab)
मैथिली ठाकुर ने गया मराठी गाना (Photo: Screengrab)

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मुंबई महानगरपालिका के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. 15 जनवरी को होने वाले मतदान से पहले मुंबई की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक सियासी माहौल गर्म है. इस बार मुकाबला सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि राजनीतिक साख और वजूद का भी माना जा रहा है.

मुंबई की राजनीति में उत्तर भारतीय वोट बैंक को हमेशा अहम माना जाता है. उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़े मतदाता कई वार्डों में नतीजे तय करने की स्थिति में होते हैं. इसी कारण सभी प्रमुख दल इस वर्ग को साधने में जुटे हैं. वार्ड क्रमांक 99 में चुनावी माहौल तब और रोचक हो गया, जब महायुति ने लोकप्रिय लोकगायिका और नवनिर्वाचित विधायिका मैथिली ठाकुर को स्टार प्रचारक के तौर पर उतारा.

सोशल मीडिया तक सियासी माहौल गर्म

मैथिली ठाकुर ने प्रचार के दौरान हिंदी गीत गाकर उत्तर भारतीय मतदाताओं से सीधा संवाद बनाया. इसके साथ ही उन्होंने मराठी गीतों की प्रस्तुति भी दी. इससे मराठी मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि महायुति सभी भाषाओं और समुदायों को साथ लेकर चलने की बात करती है. उनके गीतों और सादे अंदाज को लेकर चुनावी चर्चा तेज हो गई है.

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इस बार बीएमसी चुनाव में गठबंधन के समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं. शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और मनसे का साथ आना चुनाव का बड़ा फैक्टर माना जा रहा है. यह गठबंधन मराठी अस्मिता के मुद्दे पर फिर से बीएमसी में पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है. वहीं भाजपा, शिवसेना शिंदे गुट और आरपीआई का गठबंधन पहली बार बीएमसी की सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरा है.

मैथिली ठाकुर ने गया हिंदी और मराठी में गाना

चुनाव प्रचार का शोर अब थमने वाला है. 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को नतीजे सामने आएंगे. मैथिली ठाकुर की हिंदी मराठी जुगलबंदी महायुति के लिए कितना असरदार साबित होती है, या ठाकरे ब्रांड का प्रभाव कायम रहता है, इसका जवाब मतपेटियों से मिलेगा.

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