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रूपाली चाकणकर से 177 तो एकनाथ शिंदे से 17 बार हुई अशोक खरात की बात करने का दावा! अंजलि दमानिया ने बताया कैसे मिली CDR

महाराष्ट्र में अशोक खारत मामला सियासी मुद्दा बन गया है. अंजलि दमानिया ने दावा किया कि उन्होंने सीडीआर का AI से विश्लेषण कर नेताओं से बातचीत उजागर की. उन्होंने देवेंद्र फडणवीस पर 'सुविधा की राजनीति' का आरोप लगाया. दमानिया ने कॉल्स और संदिग्ध लेन-देन में बढ़ोतरी की बात कही और जांच की मांग की.

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अंजलि दमानिया ने बताया कि उन्होंने कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण कैसे किया. Photo ITG
अंजलि दमानिया ने बताया कि उन्होंने कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण कैसे किया. Photo ITG

महाराष्ट्र में रेप के आरोपी अशोक खारत का मामला अब सियासी तकरार का बड़ा मुद्दा बन गया है. सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने गिरफ्तार स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खारत के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण AI के जरिये किया है. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर 'सुविधा की राजनीति' करने का आरोप लगाया.

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, दमानिया ने कहा कि उन्होंने एआई आधारित लार्ज लैंग्वेज मॉडल 'क्लॉड' का उपयोग कर यह पता लगाया कि खारत के मोबाइल से किस व्यक्ति को कितनी बार कॉल किए गए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया और एक्सेल डेटा को एआई टूल के जरिए जांचने के बाद ही संबंधित जानकारी अधिकारियों के साथ साझा की.

दमानिया के मुताबिक, खारत 18 मार्च से दुष्कर्म के आरोप में जेल में है और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच 17 बार बातचीत हुई. जबकि रूपाली चाकणकर से 177 बार बात हुई. दमानिया सुनील तटकरे, चंद्रकांत पाटिल और आशीष शेलार जैसे नेताओं के नाम भी लिए.

क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लेन-देन के मैसेज 
वहीं, दमानिया ने समता क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े लेन-देन के मैसेज में असामान्य बढ़ोतरी का भी दावा किया. उन्होंने कहा कि 27 जनवरी को 17 मैसेज, 28 जनवरी को 19 मैसेज और इसके बाद भी कई मैसेज आए, जो सामान्य पैटर्न से अलग हैं. उनका आरोप है कि ये मैसेज खारत के खाते में जमा या निकासी से जुड़े हो सकते हैं और जांच एजेंसियों को इसकी गहन पड़ताल करनी चाहिए.

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मुख्यमंत्री फडणवीस पर सुविधा की राजनीति करने का आरोप
मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना साधते हुए दमानिया ने कहा कि उनसे संपर्क करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि वे केवल 'सुविधा की राजनीति' कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें अब केवल पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते से ही उम्मीद है.

गौरतलब है कि दमानिया ने यह भी बताया कि उन्हें यह सीडीआर एक अज्ञात व्यक्ति से व्हाट्सएप पर मिला, जिसने खुद को निजी जासूस बताया. इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं कि उन्हें यह संवेदनशील जानकारी कैसे मिली, जबकि मुख्यमंत्री फडणवीस ने मामले की जांच कराने की बात कही है.

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