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बारामती में 3 KM की विजिबिलिटी, फिर क्यों नहीं दिखा रनवे? प्लेन मालिक ने कहा- पायलट ने 'मिस्ड अप्रोच' किया, पवार के प्लेन एक्सीडेंट की पूरी कहानी

अजित पवार जिस विमान से सफर कर रहे थे उसके मालिक वीके सिंह ने हादसे को लेकर कई जानकारियां दी है. उन्होंने कहा कि पायलट शायद रनवे देख नहीं पाया और उसने "मिस्ड अप्रोच" किया. मिस्ड अप्रोच का मतलब है कि पहली बार में पायलट लैंडिंग नहीं कर सका और विमान को फिर से ऊपर ले गया. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बारामती में घटना के वक्त विजिबिलिटी 3 किलोमीटर तक थी.

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अजित पवार लीयरजेट नाम के निजी प्लेन से सफर कर रहे थे. (Photo: ITG)
अजित पवार लीयरजेट नाम के निजी प्लेन से सफर कर रहे थे. (Photo: ITG)

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार जिस विमान से सफर कर रहे थे, उसके मालिक का बयान आया है. विमान लीयरजेट के मालिक वीके सिंह ने कहा कि पायलट शायद रनवे देख नहीं पाया और उसने "मिस्ड अप्रोच" किया. वीके सिंह ने कहा, "शुरुआत में ऐसा लगता है कि पायलट रनवे नहीं देख पाया और इसीलिए उसने मिस अप्रोच किया होगा. अगर पायलट लैंडिंग करने में कम्फर्टेबल नहीं होता है, तो वह मिस अप्रोच करता है."

'मिस अप्रोच' एक स्टैंडर्ड प्रोसीजर है जिसे पायलट तब करते हैं जब इंस्ट्रूमेंट अप्रोच के दौरान लैंडिंग सुरक्षित रूप से पूरी नहीं की जा सकती, जिसे अक्सर गो-अराउंड भी कहा जाता है. 

मिस्ड अप्रोच को आसान भाषा में समझें

एविएशन सेक्टर में मिस्ड अप्रोच एक मानक प्रक्रिया है, जिसे पायलट तब फॉलो करता है जब इंस्ट्रूमेंट अप्रोच (जैसे ILS, RNAV, VOR आदि) को पूरा करके सुरक्षित लैंडिंग नहीं कर पाता. सरल शब्दों में कहें तो जब लैंडिंग की कोशिश असफल हो जाती है या सुरक्षित नहीं लगती, तो पायलट अप्रोच को छोड़कर विमान को दोबारा ऊपर ले जाता है. इसे ही मिस्ड अप्रोच कहते हैं. 

यह प्रक्रिया International Civil Aviation Organization और Federal Aviation Administration जैसी एजेंसियों द्वारा निर्धारित होती है, और हर इंस्ट्रूमेंट अप्रोच चार्ट पर एक अलग सेक्शन में मिस्ड अप्रोच प्रोसीजर लिखा होता है. 

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संक्षेप में मिस्ड अप्रोच का अर्थ है कि "जब लैंडिंग नहीं हो रही तो सुरक्षित तरीके से वापस ऊपर जाओ" की प्रक्रिया है. यह जीवन बचाने वाली होती है, खासकर खराब मौसम या कम विजिबिलिटी में. बारामती हादसे में यही प्रक्रिया जानलेवा साबित हुई. 

गो अराउंड क्या है

एविएशन डिक्शनरी में गो-अराउंड भी एक सुरक्षा प्रक्रिया है, जिसमें पायलट लैंडिंग की कोशिश को बीच में रोक देता है और विमान को तुरंत वापस ऊपर ले जाता है. यह एक रूटीन लेकिन महत्वपूर्ण मैन्यूवर है, जो पायलट खुद शुरू कर सकता है या एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) का निर्देश पर किया जा सकता है.  

हादसे के बाद बारामती एयरपोर्ट की तस्वीर (Photo: ITG)

बता दें कि लीयरजेट नाम के इस विमान को बुधवार सुबह एक बार गो अराउंड करना पड़ा था. यानी कि विमान एक बार में सफल लैंडिंग नहीं कर पाया था. इसके बाद इस विमान को बारामती में लैंडिंग की इजाज़त मिल गई थी.

लेकिन आखिरकार क्लीयरेंस मिलने के बाद भी इस विमान  ATC को कोई 'रीड-बैक' नहीं दिया, और कुछ ही देर बाद रनवे के किनारे उसमें आग लग गई. 

रीड बैक समझे बिना बात अधूरी है

एविएशन की भाषा में रीडबैक एक ज़रूरी सेफ्टी प्रोसीजर है जिसमें पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से मिले मैसेज या इंस्ट्रक्शन के ज़रूरी हिस्सों को दोहराता है. यह एक "क्लोज्ड-लूप" कम्युनिकेशन सिस्टम की तरह काम करता है, यह पक्का करता है कि कंट्रोलर के इंस्ट्रक्शन फ्लाइट क्रू ने सही ढंग से सुना और समझा है. 

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विमान के हादसे की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल है. 

VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ऑपरेट किया जाने वाला 16 साल पुराना चार्टर्ड विमान बारामती एयरपोर्ट पर दूसरी लैंडिंग अप्रोच की कोशिश करते समय क्रैश हो गया. यह एक अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड है जहां ट्रैफिक की जानकारी आमतौर पर लोकल फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन के इंस्ट्रक्टर और पायलट देते हैं. 

3000 मीटर की विजिबिलिटी, फिर क्यों नहीं दिखा रनवे

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो अभी इस बात का एनालिसिस कर रहा है कि रिपोर्ट की गई 3,000 मीटर विजिबिलिटी के बावजूद क्रू को रनवे के साथ विजुअल कॉन्टैक्ट बनाए रखने में दिक्कत क्यों हुई. 

ऐसे समझें पूरी घटना

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने बारामती में एयर ट्रैफिक कंट्रोल संभालने वाले व्यक्ति के हवाले से घटनाओं के क्रम के बारे में एक बयान जारी किया जिसमें बताया गया कि शांत मौसम की रिपोर्ट के बावजूद, लैंडिंग की कोशिश के दौरान फ्लाइट को विजिबिलिटी की समस्या हुई.

बयान में कहा गया कि सुबह 8.18 बजे, विमान ने बारामती एयर ट्रैफिक कंट्रोल से पहली बार संपर्क किया, जब पुणे अप्रोच ने उसे बारामती से 30 नॉटिकल मील (लगभग 55 किमी) पहले छोड़ा था.

क्रू को विजुअल मेट्रोलॉजिकल स्थितियों के तहत अपनी मर्जी से नीचे उतरने की सलाह दी गई और उन्हें यह भी बताया गया कि हवा शांत है और विजिबिलिटी लगभग 3,000 मीटर है.

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रनवे के लिए फाइनल अप्रोच पर पहुंचने पर क्रू ने बताया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है और रनवे पर दूसरी कोशिश के लिए पोजीशन बदलने के लिए गो-अराउंड शुरू किया.

शुरुआत में यह बताने के बाद कि रनवे अभी भी दिखाई नहीं दे रहा है, क्रू ने कुछ ही सेकंड बाद "रनवे दिखाई दे रहा है" बताया और ATC ने सुबह 8.43 बजे विमान को लैंड करने की मंजूरी दे दी.

हालांकि क्रू ने इस फाइनल मंजूरी का अनिवार्य रीडबैक नहीं दिया और सुबह 8.44 बजे, आखिरी कम्युनिकेशन के ठीक एक मिनट बाद, ATC कर्मियों ने रनवे के किनारे के पास आग की लपटें उठती देखीं.

बता दें कि 28 जनवरी 2026 की सुबह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार का निजी चार्टर्ड विमान लीयरजेट-45 बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया. विमान मुंबई से बारामती जा रहा था, जहां अजित पवार जिला परिषद चुनाव प्रचार के लिए कार्यक्रमों में शामिल होने वाले थे.

हादसा सुबह करीब 8:45 बजे हुआ, जब विमान दूसरी अप्रोच की कोशिश कर रहा था. धुंध और कम विजिबिलिटी के कारण गो-अराउंड मैन्यूवर के बाद विमान की क्रैश लैंडिंग हुई, और विमान रनवे से बाहर गिरा और फट गया इसके बाद इसमें आग लग गई. 

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इस विमान में कुल 5 लोग सवार थे. इनमें, अजित पवार, उनके पीएसओ विदिप जाधव, अटेंडेंट पिंकी माली, पायलट सुमित कपूर और को-पायलट शांभवी पाठक शामिल थे. इन सभी की मौके पर ही मौत हो गई. 

रिहायशी इमारतों के पास गिरे प्लेन के टुकडे

चश्मदीदों के मुताबिक धमाका इतना ज़ोरदार था कि प्लेन के टुकड़े हवा में उड़ गए और रिहायशी इमारतों के पास गिरे. एक चश्मदीद ने बताया, "नीचे आने से पहले प्लेन टेढ़ा हो गया था. हमने धमाका देखा और यह बहुत डरावना था."

एक और चश्मदीद ने बताया कि रनवे से करीब 100 फीट ऊपर की ऊंचाई पर प्लेन का कंट्रोल खत्म हुआ लग रहा था.

"जिस तरह से प्लेन नीचे आ रहा था, हमें लगा कि यह क्रैश हो जाएगा... जैसे ही हम उसकी तरफ भागे, हमने आग की लपटें देखीं, जिसके बाद लगातार चार-पांच धमाके हुए, जिससे हम प्लेन के पास नहीं जा पाए."

घटनास्थल पर मौजूद एक गवाह प्रमोद मदुरिकर ने बताया कि क्रैश के तुरंत बाद पीड़ितों की पहचान कर ली गई और उन्हें एम्बुलेंस में ले जाया गया. फायर ब्रिगेड के लोग भी जल्द ही मौके पर पहुंच गए.
 

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