देश की सर्वोच्च अदालत ने मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ को झटका देते हुए कल शाम तक उन्हें बहुमत हासिल करने को कहा है. इस मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एमपी विधानसभा के स्पीकर एनपी प्रजापित को आदेश दिया कि वे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं और इस सत्र में फ्लोर टेस्ट करावाया जाए. अदालत ने 20 मार्च को शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड ने पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि जिन 16 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया है उन पर विधानसभा में आने का कोई दबाव नहीं है. लेकिन अगर विधायक सदन में आना चाहते हैं तो कर्नाटक और एमपी की पुलिस उन्हें सुरक्षा देगी. इसी के साथ सबकी निगाहें अब मध्य प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम और वहां के सत्ता के समीकरण पर चली गई है.
ऐसा है सीटों का गणित
मध्य प्रदेश में विधानसभा की 230 सीटें हैं. इस वक्त 2 सीटें खाली हैं. इस तरह से विधानसभा की मौजूदा शक्ति 228 है.
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मध्य प्रदेश में कांग्रेस के 114 विधायक हैं. लेकिन पार्टी के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है. हालांकि स्पीकर ने इस वक्त 6 विधायकों का ही इस्तीफा स्वीकार किया है, जबकि 16 विधायकों का इस्तीफा स्पीकर के पास लंबित है. वर्तमान परिस्थिति के हिसाब से विधानसभा की मौजूदा शक्ति 222 है. यहां बहुमत का आंकड़ा 112 है. बता दें 2018 के विधानसभा चुनाव में एमपी में बीजेपी ने 107 सीटों पर जीत हासिल की थी.
आंकड़ों में बहुमत से दूर हुई कांग्रेस
कांग्रेस के खाते में पहले 114 विधायक थे, लेकिन 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में उसके 92 विधायक रह गए हैं. कांग्रेस को इस वक्त बीएसपी के 2, समाजवादी पार्टी के 1 और 4 निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है. इस तरह से कुल मिलाकर कांग्रेस का आंकड़ा 99 हो जाता है, जो कि बहुमत के आंकड़े से कम है, जबकि बीजेपी के पास 107 विधायक हैं.
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स्पीकर ने स्थगित की थी विधानसभा
बता दें कि 16 मार्च को स्पीकर एनपी प्रजापति ने कोरोना वायरस के संक्रमण का हवाला देते हुए विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित कर दी थी, लेकिन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सीएम कमलनाथ को बहुमत हासिल करने को कहा है.