कहते हैं जब जीने का जज्बा हो तो साल, मौसम और दशक यूं ही बीत जाते हैं. कम से कम मध्य प्रदेश के उन 32 हजार 172 लोगों के लिए तो यह बात बिल्कुल सटीक बैठती है, जिन्होंने उम्र का सैकड़ा पार कर लिया है. खास बात यह है कि यहां 2001 से 2011 के बीच के दशक के दौरान 100 साल से अधिक उम्र वाले लोगों की संख्या लगभग चार गुना बढ़ी है.
मध्यप्रदेश के जनगणना कार्य निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार सूबे में 2001 की जनगणना के दौरान 100 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 8,431 थी, जो 2011 की जनगणना के दौरान बढ़कर 32,172 पर पहुंच गई है.
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश की कुल आबादी सात करोड़ 26 लाख 26 हजार 809 है. इस आबादी का लगभग 37.50 फीसदी हिस्सा 18 से 40 वर्ष के आयु वर्ग का है. 2001 में सूबे की कुल आबादी छह करोड़ तीन लाख 48 हजार 23 थी, जिसका 36.6 फीसद हिस्सा 18 से 40 वर्ष के आयु वर्ग का था. यानी दशक के दौरान सूबे की कुल आबादी में इस आयु वर्ग के हिस्से में भी लगभग एक फीसदी का इजाफा हुआ है.
इंदौर में है सबसे अधिक युवा जनसंख्या
राज्य में 18 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों की सबसे अधिक आबादी इंदौर में है. यहां इस आयु वर्ग के लोगों की तादाद 13 लाख 58 हजार 417 है. इस फेहरिस्त में जबलपुर 10 लाख दो हजार 521 लोगों के साथ दूसरे नंबर पर, नौ लाख 88 हजार 899 लोगों के साथ भोपाल तीसरे तो सागर नौ लाख 229 लोगों के साथ चौथे और रीवा आठ लाख 46 हजार 132 लोगों के साथ पांचवें पायदान पर है.
राज्य में 18 से 40 वर्ष की उम्र वाले लोगों की सबसे कम आबादी हरदा जिले में है. हरदा में इस आयु वर्ग के लोगों की तादाद दो लाख 12 हजार 544 है.