अगर आप इंदौर में रहते हैं और गाड़ी चलाते हैं तो अब सावधान हो जाइए, क्योंकि अब ट्रैफिक रूल तोड़ना आपको और आपके परिवार को थाने पहुंचा सकता है. डरिए नहीं, थाने में आपको या परिवार को हवालात में बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि काउंसलिंग की जाएगी कि ट्रैफिक रूल तोड़ने के क्या नुकसान हो सकते हैं और कैसे इससे बचा जाए.
दरअसल ये पूरी मुहिम उन लोगों को सुधारने के लिए शुरू की जा रही है जो ट्रैफिक रूल तोड़ते हुए पकड़े जाते हैं और चालान या जुर्माना भी देते हैं. लेकिन सुधरने की बजाय बार बार ट्रैफिक रूल तोड़ते हैं. और खुद के साथ-साथ दूसरों की जान के लिए भी खतरा खड़ा करते हैं.
इंदौर के डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा के मुताबिक ट्रैफिक रूल तोड़ने वाले को उसके पूरे परिवार समेत इंदौर के पिपलियाहाना थाने बुलाया जाएगा, जहां ट्रैफिक एक्सपर्ट और काउंसलर के जरिए सभी को समझाइश और परामर्श दिया जाएगा.
डीआईजी के मुताबिक इंदौर के पिपलियाहाना में ट्रैफिक परामर्श का सेट-अप बनाया गया है, जहां ट्रैफिक रूल तोड़ने वाले और उसके परिवार वालों को अलग-अलग हादसों में क्षतिग्रस्त वाहनों की तस्वीरों के अलावा सड़क हादसों और उसमें होनी वाली मौतों का आंकड़ा ऑडियो-वीडियो फॉर्मेट में बताया जाएगा.
इसके अलावा हादसों के साथ-साथ जिंदगी की अहमियत पर बनी शॉर्ट फिल्में भी दिखाई जाएगी. डीआईजी के मुताबिक इसका मकसद परिवार वालों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें ये समझाना होगा कि वो अपने परिजनों को ट्रैफिक रूल ना तोड़ने के लिए समझाएं.
इस पूरी प्रक्रिया के लिए सबसे पहले ट्रैफिक रूल तोड़ने मसलन ड्रंक एंड ड्राइविंग, ओवर स्पीडिंग, रैश डाइविंग या दूसरे ट्रैफिक रूल तोड़ने पर हुए चालान के आधार पर व्यक्ति को चिन्हित किया जाएगा और फिर उसे परिवार समेत पिपलियाहाना थाने बुलाया जाएगा.
काउंसलिंग के बाद उसे परिवार के सामने ही शपथ भी दिलाई जाएगी किआगे से वो ट्रैफिक नियमों का पालन करेंगे. पुलिस के मुताबिक चालानी कार्रवाई से कुछ समय के लिए तो नियम तोड़ने वाले डर जाते हैं, लेकिन फिर वही काम करते हैं. उम्मीद है इस नई मुहिम से उन्हें अहसास होगा कि उनकी जिंदगी उनके अलावा परिवार के लोगों के लिए भी खास है और वो नियम तोड़ने से पहले सोचेंगे.