मध्य प्रदेश की खजुराहो लोकसभा सीट पर 68.01 प्रतिशत वोट डाला गया है. मध्य प्रदेश की सात लोकसभा सीटों पर पांचवें चरण में औसत 68.98 फीसदी मतदान हुआ है. बता दें कि परिसीमन के बाद से बीजेपी को इस सीट पर 7 चुनावों में जीत मिली है तो वहीं 6 बार कांग्रेस भी जीती है. हालांकि खजुराहो लोकसभा सीट पर बीते 3 चुनावों से बीजेपी को ही जीत मिलती रही है.
अपडेट्स
खजुराहो लोकसभा सीट पर ताजा अपडेट के मुताबिक 52.03 प्रतिशत मतदाता अपना वोट डाल चुके हैं.
एमपी की खजुराहो लोकसभा सीट पर दोपहर 2 बजे तक 42.51 फीसदी वोटिंग हुई है, मतदान अभी जारी है.
खजुराहो लोकसभा सीट पर ताजा अपडेट के मुताबिक 29.73 प्रतिशत मतदान हो चुका है. प्रचंड धूप के बावजूद अभी भी लोग मतदान केंद्रों पर खड़े हैं.
मध्य प्रदेश की खजुराहो लोकसभा सीट पर शांतिपूर्वक मतदान चल रहा है. यहां पर 11 बजे तक 15.17 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके हैं.
चुनावी रण में उतरे ये उम्मीदवार
2019 के लोकसभा चुनाव में खजुराहो संसदीय क्षेत्र से कुल 17 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विष्णु दत्त शर्मा को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस ने महारानी कविता सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है. समाजवादी पार्टी (सपा) की ओर से वीर सिंह पटेल चुनाव लड़ रहे हैं. इनके अवाला 7 निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
खजुराहो लोकसभा सीट का सियासी समीकरण
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नागेंद्र सिंह ने कांग्रेस के राजा पटेरिया को हराया था. इस चुनाव में नागेंद्र सिंह को 4,74,966 (54.31 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं राजा पटेरिया को 2,27,476 (26.01फीसदी) वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 2,47,490 वोटों का था. वहीं बसपा 6.9 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी.
इससे पहले 2009 के चुनाव में भी बीजेपी को जीत मिली थी. बीजेपी के जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस के राजा पटेरिया को हराया था. जितेंद्र सिंह को 2,29,369 (39.34 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं राजा पटेरिया को 2,01,037 (34.48 फीसदी) वोट मिले थे. जितेंद्र सिंह ने राजा पटेरिया को 28,332 वोटो से हराया था.वहीं बसपा 13.22 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी.
खजुराहो सीट का राजनीतिक इतिहास
खजुराहो लोकसभा सीट पर 1957 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के राम सहाय ने जीत हासिल की थी. 1957 में यहां पर फिर से चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस के ही मोतीलाल मालवीय विजयी रही. इसके अगले चुनाव 1962 में कांग्रेस ने यहां पर जीत की हैट्रिक लगाई और राम सहाय एक बार फिर से सांसद बने. 1977 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई और भारतीय लोकदल के लक्ष्मी नारायण नायक यहां के सांसद बने. 1977 का चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने 1980 में एक बार फिर वापसी की. कांग्रेस की विद्दावती चतुर्वेदी ने लक्ष्मीनारायण नायक को शिकस्त दी.
उमा भारती 4 बार रह चुकी हैं सांसद
विद्दावती ने इसके बाद अगला चुनाव भी जीता और उन्होंने उमा भारती को मात दी. उमा भारती का इस सीट पर पहला चुनाव था. हालांकि उमा भारती ने 1989 के चुनाव में बदला लिया और विद्दावती चतुर्वेदी को हराया. उमा भारती ने इसके बाद 1991, 1996 और 1998 का चुनाव भी जीता. 1999 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां से सत्यव्रत चतुर्वेदी को टिकट दिया. सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कांग्रेस की इस सीट पर वापसी कराई और सांसद बने.
2004 में बीजेपी ने एक बार फिर यहां पर वापसी की. बीजेपी के रामकृष्ण खुशमरिया ने इस बार सत्यव्रत चुतर्वेदी को मात दे दी. बीजेपी ने इसके बाद अगले 2 चुनाव में यहां से अपने उम्मीदवार को बदला और दोनों ही बार जीत मिली.
खजुराहो लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत चांदला, गुन्नौर, मुरवारा, राजनगर, पन्ना, बहोरीबंद, पवई, विजयराघवगढ़ ये 8 विधानसभा सीटें आती हैं. जिसमें से 6 सीटों पर बीजेपी और 2 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है.
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