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MP: बीजेपी को बड़ा झटका, पार्टी के विधायक की सदस्यता हुई रद्द

मध्य प्रदेश में बीजेपी का एक और विधायक कम हो जाने की वजह से कमलनाथ सरकार और मजबूत हो गई है. वहीं हाल ही में झाबुआ विधानसभा का उपचुनाव हार चुकी बीजेपी के लिए एक और विधायक का कम होना दोहरे झटके से कम नहीं है.

 बीजेपी विधायक प्रह्लाद लोधी बीजेपी विधायक प्रह्लाद लोधी

  • बीजेपी विधायक कम होने से कमलनाथ सरकार और मजबूत
  • बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को बताया गलत

मध्यप्रदेश में बीजेपी को बहुत बड़ा झटका लगा है. पवई से बीजेपी विधायक प्रह्लाद लोधी की सदस्यता खत्म हो गई. विधायक पर रेत माफिया के साथ तहसीलदार पर हमला करने का आरोप था जिसमें कोर्ट ने लोधी को 2 साल की सजा सुनाई थी.

कमलनाथ सरकार और मजबूत

विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने बताया कि 'उन्हें आज कोर्ट की सर्टिफाईड कॉपी मिली जिसके बाद गजट में छपने के लिए चुनाव आयोग को सूचित कर दिया गया है कि विधानसभा में एक पद रिक्त हो गया है.'

मध्य प्रदेश में बीजेपी का एक और विधायक कम हो जाने की वजह से कमलनाथ सरकार और मजबूत हो गई है. वहीं हाल ही में झाबुआ विधानसभा का उपचुनाव हार चुकी बीजेपी के लिए एक और विधायक का कम होना दोहरे झटके से कम नहीं है.

मध्यप्रदेश में बीजेपी ने विधानसभा चुनावों में 109 सीटें जीती थीं. बाद में  लोकसभा चुनाव के दौरान वहां से विधायक रहे जीएस डामोर को सांसद बनने के बाद सीट छोड़नी पड़ी.  उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने जीत दर्ज की और सदन में बीजेपी के 108 विधायक हो गए थे. अब पवई से विधायक प्रह्लाद लोधी की सदस्यता खत्म होने के बाद सदन में बीजेपी के 107 विधायक रह गए है. इसके बाद अब कमलनाथ की सरकार पूर्ण बहुमत में आ गई है.

बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को बताया गलत

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय सदन के अभिभावक के अनुकूल नहीं है. ये अलोकतांत्रिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है. राकेश सिंह ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष सदन के अभिभावक होते हैं, उनकी गरिमा होती है और इस होने के नाते दलीय राजनीति से ऊपर उठकर समानता के आधार पर विचार करते हैं.

आगे उन्होंने कहा, 'मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति जी ने विधानसभा अध्यक्ष की तरह व्यवहार न करते हुए राजनीतिक विद्वेषवश कांग्रेस के नेता की तरह निर्णय करते हुए पवई विधानसभा सीट को रिक्त घोषित किया है. पवई विधायक को न्याय के लिए उच्च न्यायालय में जाने का अधिकार है और हम जाएंगे भी, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के इस निर्णय ने सदन में भविष्य के लिए ऐसी परंपरा को विकसित कर दिया है जो किसी भी कोण से उचित नहीं कही जा सकती.'

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