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झारखंड: शक के घेरे में स्वास्थ्य मंत्री का अस्पताल

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी की संस्था रामचंद्र चंद्रवंशी वेलफेयर ट्रस्ट के द्वारा गलत जानकारी देकर ट्रेनिंग कॉलेज खोलने का मामला सामने आया है.

स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी की संस्था रामचंद्र चंद्रवंशी वेलफेयर ट्रस्ट के द्वारा गलत जानकारी देकर ट्रेनिंग कॉलेज खोलने का मामला सामने आया है. आरोप है कि संस्था ने मंत्रीजी के चुनावक्षेत्र विश्रामपुर के नावाडीह कलां इलाके में जीएनएम की पढ़ाई के लिए इंडियन नर्सिंग काउन्सिल को झूठी रिपोर्ट पेश की, जिसके आधार पर संस्था को जीएनएम की पढ़ाई के लिए इजाजत मिल गई जबकि हकीकत में उस जगह पर कोई अस्पताल चल ही नहीं रहा है.

अस्पताल के लिए बिल्डिंग जरूर बनी है लेकिन अभी उसमें काफी काम बाकी है. पलामू जिले का बिश्रामपुर स्थित सोहारी चंद्रवंशी हॉस्पिटल दावे के मुताबिक यहाँ बाकायदा 100 बिस्तरों वाला अस्पताल बीते चार महीने से चल रहा है. यहां मरीजों का इलाज भी होने के दावे किए जा रहे हैं. ऐसा ही कुछ जिले के तत्कालीन सिविल सर्जन सह डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्री अथॉरिटी की रिपोर्ट भी कहती है. जिन्होंने 28 अप्रैल 2016 में संस्था की रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए कहा था कि उन्होंने ट्रेनिंग कॉलेज चलाने लायक सभी सुविधाओं को भौतिक निरीक्षण कर सही पाया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल में 100 बेड, जरुरी उपकरण और डॉक्टर्स हैं. इसी रिपोर्ट के आधार पर नर्सिंग काउन्सिल ने अस्पताल को साल 2016-17 के लिए कॉलेज खोलने की अनुमति दी थी. दरअसल संस्था के सचिव ने नर्सिंग काउन्सिल को फरवरी में दिए अपने आवेदन में जीएनएम की पढ़ाई के लिए अनुमति मांगी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि संस्था के पास 100 बिस्तरों वाला अस्पताल है. वहीँ स्थानीय लोग ऐसे किसी भी अस्पताल के होने की बात नकार रहे हैं.

जीएनएम की पढ़ाई के लिए निर्धारित शर्त
नियम के मुताबिक जीएनएम की पढ़ाई के लिए निर्धारित शर्तों में 100 बिस्तरों का अस्पताल होना जरुरी है. यदि ऐसा नहीं है तो कॉलेज आस-पास के किन्हीं तीन अस्पतालों से अपनी संबद्धता दर्शाते हुए इसका दावा कर सकता है. बशर्ते ये अस्पताल कॉलेज से 15 से 30 किलोमीटर की परिधि में हो. पहाड़ी क्षेत्रों में यह दूरी 50 किलोमीटर तक हो सकती है. गाइडलाइन के मुताबिक अस्पताल के 75 फीसदी बेड मरीजों से भरे होने चाहिए. इन अस्पतालों में ICU, ICCU, माइनर या मेजर ऑपरेशन थिएटर, गाइनी, बच्चों के वार्ड, हड्डी रोग, डेंटल, न्यूरो और ENT के इलाज की सुविधा होनी चाहिए. जबकि अस्पताल में ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया.

विपक्ष के निशाने पर स्वास्थ्य मंत्री
ऐसे में पलामू के पूर्व सांसद कामेश्वर बैठा का कहना है कि यह सरासर फर्जीवाड़ा है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस इलाके में अस्पताल की सख्त जरुरत है. वहीँ स्वास्थ्य मंत्रीजी का कहना है कि सब हो काम रहे हैं रामचंद्र चंद्रवंशी वेलफेयर ट्रस्ट ने पलामू जिले के कई जगहों पर शैक्षणिक संस्थान खोल रखे हैं. जिनमें शैक्षणिक, व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा दी जाती है. इनमें से अधिकतर संस्थान विश्रामपुर स्थित एक ही परिसर में हैं. SC / ST बहुल क्षेत्र होने की वजह से यहां पढ़नेवाले बच्चों को करोड़ों की छात्रवृत्ति भी मिलती है. वहीँ आरोप है कि जीएनएम की पढ़ाई शुरू होने से संस्था को काफी आर्थिक लाभ होगा.

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