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Uttarakhand में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी तेज, दिल्ली में हुई बैठक

Uniform Civil Code: देहरादून में दूसरी बैठक 14 या 15 जुलाई को हो सकती है. उत्तराखंड से दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अभी तो पहली बैठक हुई है. लिहाजा कब तक कमेटी की कार्यवाही पूरी होगी और रिपोर्ट कब सौंपी जाएगी इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकते हैं.

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पुष्कर सिंह धामी (File Photo) पुष्कर सिंह धामी (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 14 या 15 जुलाई को हो सकती है दूसरी बैठक
  • कमेटी की रिपोर्ट पर राय देगी उत्तराखंड की जनता- सीएम धामी

Uniform Civil Code: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर दिल्ली में पहली बैठक हुई. बैठक के बाद कमेटी की चेयरपर्सन रंजना देसाई ने कहा कि इस मीटिंग में सिर्फ आधारभूत मुद्दों पर चर्चा की गई. इस दौरान इसके आयाम, प्रभाव, दायरे और संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई. बैठक में अध्यक्ष सहित सभी पांचों सदस्य मौजूद रहे.

रंजना देसाई ने आगे बताया कि दिल्ली या देहरादून में दूसरी बैठक 14 या 15 जुलाई को हो सकती है. उत्तराखंड से दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अभी तो पहली बैठक हुई है. लिहाजा कब तक कमेटी की कार्यवाही पूरी होगी और रिपोर्ट कब सौंपी जाएगी  इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकते हैं.

CM को उम्मीद, जल्द रिपोर्ट देगी कमेटी

दिल्ली पहुंचते ही समान नागरिक संहिता पर सीएम धामी ने कहा कि उम्मीद है कि कमेटी कम से कम समय में रिपोर्ट दे देगी. कमेटी की रिपोर्ट पर उत्तराखंड की जनता अपनी राय रखेगी. फिर उत्तराखंड में इसे लागू करने के लिए समुचित विधिक कार्यवाही पूरी की जाएगी. धामी ने विपक्ष के समाज को बांटने के आरोपों पर कहा कि जिन्होंने साठ साल बांट-बांट कर राज किया वो अब ऐसी बातें न करें.

धामी ने किया था वादे पूरे करने का ऐलान

दूसरी बार उत्तराखंड का सीएम बनते ही पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता का सुर छेड़ दिया था. उन्होंने कहा था कि सत्ता संभालते ही सारे वादों को पूरा किया जाएगा, जिसमें समान नागरिक संहिता का वादा भी शामिल है. धामी चुनाव प्रचार के दौरान भी कई बार समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कर चुके थे. 

1989 से BJP के एजेंडे में शामिल

बता दें कि समान नागरिक संहिता एक ऐसा मुद्दा है, जो हमेशा से बीजेपी के एजेंडे में रहा है. 1989 के लोकसभा चुनाव में पहली बार बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता का मुद्दा शामिल किया था. 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी बीजेपी ने समान नागरिक संहिता को शामिल किया था. बीजेपी का मानना है कि जब तक समान नागरिक संहिता को अपनाया नहीं जाता, तब तक लैंगिक समानता नहीं आ सकती.

अदालतें भी कर चुकी हैं सवाल

समान नागरिक संहिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट तक सरकार से सवाल कर चुकी है. 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए कोई कोशिश नहीं की गई. वहीं, पिछले साल जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा था कि समान नागरिक संहिता जरूरी है.

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