झारखंड के धनबाद से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक आंगन से एक तरफ पिता की अर्थी निकली, तो दूसरी तरफ आंगन से बेटी की डोली निकली. इसे देखकर हर किसी की आंखे नम हो गई. परिजनों ने बताया कि बेटी की शादी 19 अप्रैल को तय थी. मगर, सब कुछ खत्म हो गया और आनन फानन में बेटी की शिव मंदिर में करा दिया गया.
घटना गोमो जीतपुर गांव की है. यहां के रहने वाले आंदोलनकारी पुनीत महतो का बेटा छत्रधारी महतो बेटी की शादी के लिए इसरी हटिया बाजार बाइक से बकरा लेने गया था. घर वापस आने के दौरान बकरे के गले से बंधा रस्सी लटक रहा था. इसे देख एक ऑटो वाले ने उसे बकरे का रस्सी लटकने की बात कही, तो उसने बकरे की रस्सी को ठीक करने लगा.
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'इलाज के दौरान छत्रधारी महतो की हुई मौत'
इसी दौरान बाइक से अनियंत्रण हो गई और सड़क किनारे खड़ी एक वाहन में टक्कर मार दी. इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. इसके बाद उसे आनन-फानन में उसे डुमरी अस्पताल ले जाया गया. जिसे बाद में धनबाद के एसएनएमएमसीएच रेफर कर दिया गया. मगर, डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को देखते हुए रांची के रिम्स में रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान छत्रधारी महतो की मौत हो गई.
'आनन-फानन में बेटी की शादी शिव मंदिर में हुई'
उधर मृतक की बेटी ममता कुमारी का विवाह 19 अप्रैल को चिंचाकी के खूंटा निवासी कुलदीप महतो के बेटे अजीत महतो के साथ तय हुई थी. लेकिन छत्रधारी महतो के अचानक दुर्घटना से मौत की सूचना पर ममता का विवाह आनन-फानन में जीतपुर स्थित शिव मंदिर में करा दी गई. वहीं, मृतक का शव घर आते ही पूरे गांव में मातम पसर गया.
'गांव में हर किसी की आंखे हुई नम'
मृतक के पिता पुनीत महतो ने बताया कि सब कुछ खत्म हो गया. घर में बेटी की शादी थी. अचानक दुखद खबर मिली कि बेटा का सड़क दुर्घटना में मौत हो गया. वहीं, स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि गांव में मातम छा गया है. एक तरफ बेटी की बिदाई हो रही रही हैं, तो वहीं उसी घर से पिता का अर्थी भी निकल रहा हैं. यह देखकर हर किसी की आंखे नम हो गई है.