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PAK के समर्थन में नारे लगाने पर मसरत के खिलाफ FIR दर्ज

श्रीनगर में बुधवार को आतंकी मसरत आलम की हिम्मत के आगे बीजेपी-पीडीपी सरकार बेबस दिखी. अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की रैली में जेल से रि‍हा आतंकी मसरत ने न सिर्फ शि‍रकत की बल्कि‍ पाकिस्तान का झंडा लहराया और पड़ोसी मुल्क के पक्ष में नारे भी लगाए.

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रैली के दौरान आतंकी मसरत आलम
रैली के दौरान आतंकी मसरत आलम

श्रीनगर में एक रैली के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने पर अलगाववादी नेता मसरत आलम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. मामले में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी समेत कई अन्य के खि‍लाफ भी मामला दर्ज किया गया है.

केंद्रीय राज्य मंत्री किरण रिजिजु ने प्रदेश सरकार को मामले में कार्रवाई के लिए कहा है. बुधवार को नई दिल्ली से श्रीनगर लौटने पर गिलानी और उनके समर्थकों ने रैली का अयोजन किया था. मामले में बड़गाम पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 120-B, 147, 341, 336, और 427 के तहत केस दर्ज किया गया है. एफआईआर में सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम, बशीर अहमद भट्ट और कई अन्य अलगाववादियों का भी नाम है.

बताया जाता है कि रैली के दौरान भीड़ में से कुछ लोगों ने सीआरपीएफ की गाड़ि‍यों पर पत्थर भी फेंका.

र‍िहाई के बाद मसरत का 'देशद्रोह'
इससे पहले, बुधवार को रिहा होने के ठीक बाद मसरत आलम ने गिलानी की रैली में शि‍रकत की. इस दौरान पाकिस्तान का झंडा लहराया गया और पड़ोसी मुल्क के पक्ष में नारे भी लगाए गए.

दिलचस्प यह कि जब 'देशद्रोह' की यह पूरी कवायद चल रही थी, तब वहां मौजूद पुलिस-प्रशासन मौन था और इस पूरे मसले पर अब मुफ्ती सरकार कुछ भी बोलने से बच रही है. 

जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर में बुधवार को जब अलगाववादी नेता सड़कों पर उतरे तो वहां पुलिसबल तैनात था. दिल्ली से श्रीनगर पहुंचने पर गिलानी की रैली में अलगाववादी मसरत आलम ने शिरकत की. इस दौरान भीड़ ने पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाए और पाक का झंडा भी बुलंद किया. लेकिन अलगाववादी राजनीति के सामने मुफ्ती सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था मूक दर्शक बनी रही. पूछने पर पुलिस ने जबाव दिया, 'सरकार की तरफ से ऐसी स्थि‍ति‍ के लिए कोई आदेश नहीं है.'

हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब श्रीनगर की सड़कों पर ऐसा कुछ हुआ है. लेकिन तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और प्रदेश में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस का राज. उन दिनों बीजेपी ने इस मुद्दे पर खूब हाय-तौबा भी मचाई थी, लेकिन अब जब प्रदेश में पीडीपी-बीजेपी की सरकार है और केंद्र में एनडीए का राज. प्रदेश सरकार की यह लापरवाही विपक्षि‍यों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकती है.

दिलचस्प यह है कि पीडीपी सरकार ने बीजेपी को भरोसा दिलाया था कि रिहाई के बाद मसरत पर पूरी नजर रखी जाएगी, लेकिन बुधवार को जो कुछ हुआ उस पर मुफ्ती सरकार लगभग मौन है.

कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा हुआ मसरत: पीडीपी
इस बीच पीडीपी के प्रवक्ता अभिजीत सिंह जसरोदिया ने कहा कि मसरत की रिहाई के पीछे पीडीपी सरकार नहीं, बल्कि‍ लंबी कानूनी प्रक्रिया है. उन्होंने कहा, 'मामला चाहे आर्म्ड फोर्स का हो या अलगाववादियों का हमारी सरकार सिर्फ शांति चाहती है. किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. जो भी होगा और हो रहा है सब कानून के तहत हो रहा है. मसरत आलम की रिहाई पीडीपी सरकार के कारण नहीं बल्कि‍ कानून के तहत हुई है.'

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