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हिमाचल के CM सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से की मुलाकात, राज्य के रोड इंफ्रा के लिए मांगा फंड

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राज्य की सड़कों और पुलों के रखरखाव के लिए केंद्रीय सहायता मांगी. उन्होंने शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरंगों के निर्माण और क्षतिग्रस्त मार्गों के शीघ्र सुदृढ़ीकरण की भी मांग की.

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हिमाचल के मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राज्य के रोड इंफ्रा के लिए फंड की मांग की. (Photo: X/@SukhuSukhvinder)
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राज्य के रोड इंफ्रा के लिए फंड की मांग की. (Photo: X/@SukhuSukhvinder)

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राज्य में सड़कों और पुलों के रखरखाव के लिए पर्याप्त केंद्रीय सहायता की मांग की. हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई. मुख्यमंत्री सुक्खू ने गडकरी के साथ बैठक में राज्य के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने को लेकर विस्तृत चर्चा की. 

इस दौरान नितिन गडकरी ने चायल-नेरिपुल-यशवंत नगर-ओछघाट सड़क के लिए सीआरआईएफ (CRIF) के तहत सैद्धांतिक रूप से 200 करोड़ रुपये की मंजूरी दी. इस रोड नेटवर्क के मजबूत होने से हिमाचल के सेब उत्पादकों को काफी लाभ होगा. सीएम सुक्खू ने शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि यह मार्ग राजधानी शिमला समेत आठ जिलों को जोड़ता है. उन्होंने पहाड़ी भू-भाग और भूगर्भीय संवेदनशीलता को देखते हुए शिमला से शालाघाट और भगर से हमीरपुर के बीच पुल की जगह टनल के निर्माण का अनुरोध किया.

मुख्यमंत्री ने बताया कि चिल बहाल से पक्का बरोह तक का रोड नेटवर्क मानसून के दौरान कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और पिछले पांच-छह वर्षों से इसका सुदृढ़ीकरण नहीं हुआ है. यह मार्ग हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच का अहम रास्ता है. उन्होंने इस खंड को एनएच-03 के तहत हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग (NH Wing) को सौंपने और एनएचएआई द्वारा 38.37 करोड़ रुपये की शीघ्र मंजूरी का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सहमति जताते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया.

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एक अन्य बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंद सिंह सुक्खू ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर राज्य के वास्तविक 29.5 प्रतिशत फॉरेस्ट और ट्री कवर को सभी पारिस्थितिकी और वन से जुड़े आकलनों में मान्यता देने की मांग की. उन्होंने कहा कि वनों के बाहर मौजूद पेड़ों (Tree Outside Forest) को पारिस्थितिकी और वन की श्रेणी में शामिल न किए जाने के कारण आधिकारिक आंकड़ों में विसंगति है, जिससे राज्य के पर्यावरणीय योगदान का सही आकलन नहीं हो पाता. उन्होंने बताया कि ऐसे पेड़ों का कवर हिमाचल प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 1.5 फीसदी है. मुख्यमंत्री ने वित्त आयोग और अन्य केंद्रीय आवंटनों में इस 1.5 प्रतिशत हिस्से को वन और पारिस्थितिकी के अंतर्गत जोड़ने पर जोर दिया.

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