हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के उपनगर में स्थित बागी पंचायत ने जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित जठिया देवी टाउनशिप परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कड़ा विरोध किया है. पंचायत की विशेष ग्राम सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर इस योजना को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है.
न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक 10 जनवरी को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में चालन, माशला, क्यारगी, शिलैला, पट्टी, पंजारि, ओडी और शिलू गांवों के ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी कृषि योग्य भूमि नहीं देंगे. ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से न सिर्फ उन्हें विस्थापन का खतरा है, बल्कि उनकी आजीविका भी पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी. ग्रामीणों द्वारा पारित प्रस्ताव की प्रति गुरुवार को मीडिया के साथ साझा की गई. प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि जठिया देवी टाउनशिप परियोजना ग्रामीण क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी. ग्रामीणों का तर्क है कि जिस भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है, उसी पर उनकी खेती और डेयरी आधारित आजीविका निर्भर है.
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (हिमुडा) द्वारा जठिया देवी टाउनशिप परियोजना की परिकल्पना वर्ष 2014 में की गई थी. इसका उद्देश्य शिमला शहर पर बढ़ते जनसंख्या दबाव और यातायात बोझ को कम करना बताया गया था. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि शहरी विकास के नाम पर ग्रामीण इलाकों की बलि नहीं दी जा सकती. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस परियोजना को ग्राम सभा की अनुमति के बिना ही आगे बढ़ाया गया, जो नियमों के खिलाफ है. इसी आधार पर उन्होंने भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति देने से साफ इनकार कर दिया है.
बागी पंचायत की ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव की प्रतियां राज्यपाल, मुख्यमंत्री, नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री, लोक निर्माण मंत्री, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सामाजिक प्रभाव आकलन इकाई को भेजी गई हैं. ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन उनकी आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को तुरंत निरस्त करे. ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे. पंचायत स्तर पर उठे इस विरोध ने जठिया देवी टाउनशिप परियोजना को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.