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डेरा में रेप का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकार छत्रपति के बेटे को न्याय का इंतजार

अंशुल ने बताया कि रेप की खबर प्रकाशित करने के बाद उनके पिता को कई बार निशाना बनाया गया था और धमकाया भी गया था. हाईकोर्ट ने रेप मामले का स्वतः संज्ञान लिया और इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी. इसके बाद 24 अक्टूबर 2002 को दो हमलावरों ने उनके पिता को गोली मार दी.

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बाबा की पोल खोलने वाले पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति को आज भी इंसाफ की तलाश
बाबा की पोल खोलने वाले पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति को आज भी इंसाफ की तलाश

बलात्कारी बाबा राम रहीम सिंह के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकार राम चंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति आज भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं. सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में 15 साल पहले दो साध्वियों के साथ रेप की खबर छापने वाले पत्रकार छत्रपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. अंशुल ने बताया कि वकील से पत्रकार बने उनके पिता राम चंद्र ने कई मीडिया संस्थानों में काम किया था.

हालांकि मीडिया संस्थानों में रहकर उनको खुलकर लिखने की आजादी नहीं मिलती थी. लिहाजा उन्होंने 'पूरा सच' नाम से अपना अखबार निकाला और फिर डेरा सच्चा सौदा में दो साध्वियों के साथ रेप की घटना को खुलकर छापा. इसमें साध्वी की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भेजी गई चिट्ठी को भी प्रकाशित किया. इस खबर के छपने के कुछ दिन बाद राम चंद्र को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई.

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उनको घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया. करीब 28 दिन बाद उनकी मौत हो गई. अंशुल ने बताया कि रेप की खबर प्रकाशित करने के बाद उनके पिता को कई बार निशाना बनाया गया था और धमकाया भी गया था. हाईकोर्ट ने रेप मामले का स्वतः संज्ञान लिया और इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी. इसके बाद 24 अक्टूबर 2002 को दो हमलावरों ने उनके पिता को गोली मार दी.

हमलावरों ने रामचंद्र को पांच गोलियां मारी. उनको घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया और वह 28 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ते रहे. इस दौरान उन्होंने स्थानीय पुलिस के सामने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर भी आरोप लगाए, लेकिन पुलिस ने FIR में उनका नाम शामिल नहीं किया. उस समय अंशुल की उम्र महज 21 साल थी. जब पुलिस ने FIR में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम के नाम को शामिल नहीं किया, तो उनको यह भी पता नहीं था कि आखिर वह अब न्याय के लिए किसके पास जाएं?

पुलिस ने उनके पिता का लिखित में बयान तक दर्ज नहीं किया. इसके बाद उन्होंने राम चंद्र की मौत की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर याचिका दायर की. साल 2014 में मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए गए, जिसको डेरा सच्चा सौदा ने चुनौती दी. सीबीआई पर दबाव डाला गया. अंशुल ने कहा कि हम पर भी मामले को वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया. उन्होंने कहा कि बाबा संत के भेष में अपराधी हैं. अब अंशुल की कानूनी लड़ाई पंचकूला की उसी सीबीआई अदालत में आखिरी चरण पर पहुंच गई है, जिसने 25 अगस्त को रेप मामले में बाबा राम रहीम को दोषी ठहराया है.

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