हरियाणा के पलवल के छायंसा गांव में पिछले 15 दिन में 12 मौतें हो चुकी हैं. मरने वालों में 5 स्कूली बच्चे भी हैं. लगातार हो रही मौतों से ग्रामीण दहशत में हैं. जिसके बाद से स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में ही डेरा डाले हुए है, लेकिन मौत का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है.
सभी में मिल रहे हैं ये लक्षण
ग्रामीण कहते हैं कि करीब 15 दिन पहले तीन लोगों की तबीयत बिगड़ी थी और तीनों की मौत हो गई थी. इसके बाद गांव में लगातार मौत होती जा रही हैं. गांव के हर घर में मरीज हैं, जिनमें से कुछ की तबीयत ज्यादा खराब है. मरीजों के परिजन अस्पतालों के चक्कर काट-काट कर परेशान हैं, लेकिन उनके बीमार परिजनों की हालत में सुधार नहीं हो रहा है.
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हालांकि, लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार लोगों की जांच कर रही है, लेकिन मौतों का कारण उनकी समझ से परे नजर आ रहा है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे गांव की स्क्रीनिंग और ब्लड सैंपल जुटा रही हैं. ज्यादातर मामलों में बुखार, खांसी, बदन दर्द और उल्टी जैसे लक्षण मिल रहे हैं. जितनी भी मौत हुईं, उन सभी में यही लक्षण थे.
मुस्लिम बाहुल्य है गांव
छायंसा गांव पलवल का मुस्लिम बाहुल्य गांव है. पिछले 15 दिन में जिन 12 लोगों की मौत हुई है, उनमें दो बच्चे पायल व हुफैज, सारिका व हुमा, पांच बुजुर्ग जामिला, आशिया, इंद्रवती, हसन, नासिर और तीन युवक दिलशाद, हब्बू, शमशुद्दीन शामिल हैं.
ग्रामीणों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम 4 मौतों के पीछे हेपेटाइटिस-B व C को कारण बता रही है. जबकि 3 मामलों में मल्टीपल ऑर्गन फैलियर और लिवर इंफेक्शन का केस बताया गया. मगर, गांव में लगातार मौतें होने की पीछे सही कारण अभी सामने नहीं आया है.
गांव छायंसा के गिर्राज और शमीम अहमद ने बताया कि गांव की आबादी करीब 5 हजार है. गांव मुस्लिम बाहुल्य है. पानी की तीन जगहों से सप्लाई होती है. गांव के कुछ घरों में सरकारी पानी की सप्लाई है. घरों में लोगों ने जमीन में अंडर ग्राउंड टैंक बना रखे हैं. जिनमें एक साथ पानी भरने के लिए गांव घर्रोट से पानी के टैंकर मंगाए जाते हैं.
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कुछ लोग हथीन शहर से आरओ प्लांट का पानी पीने के लिए मंगाते हैं. लगातार हो रही मौतों के कारण लोग डरे हुए हैं. हम बस इतना चाहते हैं कि गांव में फैल रही यह हेपेटाइटिस-बी की बीमारी जल्दी रुके और साथ ही मौतों का सिलसिला भी थम जाए.
स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा?
स्वास्थ्य विभाग की डॉ. सतिंदर वशिष्ठ ने बताया कि उनको 31 जनवरी को गांव में हो रहीं मौतों के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद 1 फरवरी को गांव जांच के लिए सैंपल लेने शुरू कर दिए गए. मृतकों के मेडिकल रिकॉर्ड को जांच करने के आदेश दिए गए. इसके बाद सभी की मेडिकल रिपोर्ट की जांच की गई, जिसमें उनको मौत के कारणों का पता चला. विभाग की तरफ से 4 टीमों का गठन किया गया है. टीमें लोगों के ब्लड सैंपल ले रही हैं. अभी तक 300 के करीब ब्लड सैंपल लेकर जांच की गई है. जिसमें 2 लोगों को हेपेटाइटिस-बी और सी के होने का पता चला है. इसके अलावा 400 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है.
डॉ. सतिंदर वशिष्ठ के मुताबिक जिन दो मरीजों में पूरी तरह से हेपेटाइटिस बी और सी के लक्षणों के बारे में पता चला है. उनको इलाज के लिए पलवल सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जिन घरों में मौत हुई हैं, उनके परिवार के लोगों के भी सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं.
पानी के 107 में से 23 सैंपल फेल पाए गए हैं. ऐसे में लोगों के घरों में पीने के पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं. अभी तक 107 में से 23 सैंपल फेल मिले हैं. इनमें बैक्टीरिया ग्रोथ मिली है. क्योंकि यहां लोग घरों में हौदी में पानी स्टोर करके रखते हैं. पानी में क्लोरीन की भी कमी पाई गई है.