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दिल्ली पुलिस में तैनात हरियाणा की बेटी की अनूठी पहल, शादी से पहले उठाया ये कदम

अलका ने कहा कि पेड़ों की कटाई से कागज बनता है. अक्सर समाज में लोग अपना वैभव दिखाने के लिए शादी कार्डों पर हजारों लाखों रुपये खर्च करते हैं. कुछ दिनों बाद उन्हें फेंक दिया जाता है. ऐसा करने से कार्ड पर छपे देवी -देवताओं का भी अनादर होता है.

अपने पिता के साथ अलका यादव (फोटो-अनिल सिहाग) अपने पिता के साथ अलका यादव (फोटो-अनिल सिहाग)

  • अपने क्षेत्र में यह अनूठा शादी का कार्ड बना हुआ है चर्चा का विषय
  • स्याही हटने के बाद रुमाल के रूप में इस्तेमाल हो सकता है ये कार्ड
  • अपनी बारात में आए हर एक बाराती को एक एक पौधा देगी ये बेटी

समाज में लोग बेटे के पैदा होने पर खुशियां मनाते हैं और बेटियों से घृणा करते हैं. लेकिन बेटियां ऐसे उदाहरण पेश कर रही हैं जो सराहनीय हैं. आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं. हरियाणा के नारनौल की रहने वाली और दिल्ली पुलिस में कॉन्सटेबल अलका यादव ने बताया कि मैं दिल्ली पुलिस में कार्यरत हूं. मेरे होने वाले पति चंडीगढ़ हाईकोर्ट में वकील हैं. बेटियों को मां-बाप बोझ ना समझें, इसके लिए हमने बिना दहेज शादी करने का फैसला लिया है.

खासतौर पर उन्होंने शादी का अनोखा कार्ड बनाने का भी फैसला किया है. कार्ड को लेकर उन्होंने फैसला इसलिए लिया शादी का कार्ड स्याही हटने के बाद रुमाल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कागज से छपे कार्डों पर केमिकल युक्त स्याही का प्रयोग होता है. बाद में इस कार्ड या तो कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है. इससे प्रदूषण भी फैलता है.

अलका ने कहा कि कागज पेड़ों की कटाई से बनता है. अक्सर समाज में लोग अपना वैभव दिखाने के लिए शादी कार्डों पर हजारों लाखों रुपये खर्च करते हैं. कुछ दिनों बाद उन्हें फेंक दिया जाता है. ऐसा करने से कार्ड पर छपे देवी देवताओं का भी अनादर होता है.

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दुल्हन अलका यादव ने कहा, मेरा मानना है कि मां-बाप से बढ़ कर कोई देवता नहीं है. पर्यावरण को बचाने के लिए प्रत्येक बाराती को एक एक पौधा दिया जाएगा. सबसे बड़ी बात यह है कि यह शादी बिना दहेज की होगी. यह शादी समाज को एक नई दिशा देने का काम करेगी.

ससुराल पक्ष के साथ मिलकर रुमाल पर शादी कार्ड छपवाकर एक नई पहल की है. हमारी शादी दहेज रहित और बिल्कुल सिंपल तरीक़े से होगी. समाज में दहेज का आडंबर इस कदर फैला हुआ है कि क्या कहा जाए.

दूल्हा बनने वाले परीक्षित यादव ने कहा कि हमारा मानना है कि दहेज के रूप में जो पैसा बर्बाद किया जाता है उस पैसे को या तो आर्मी कोष में देना चाहिए या फिर किसी जरूरतमंद को दान करना चाहिए. हमारा उद्देश्य समाज से कुरीतियों को मिटाना है कि लोग बेटियों को बोझ ना समझें. मैं और मेरी होने वाली पत्नी समाज को यही संदेश देना चाहते हैं.

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