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अल फलाह यूनिवर्सिटी को अटैच कर सकती है ED, दिल्ली धमाकों से जुड़े हैं तार

ईडी हरियाणा की अल फालह यूनिवर्सिटी की संपत्ति जब्त करने की तैयारी में है. आरोप है कि यूनिवर्सिटी का निर्माण अपराध से कमाई गई रकम से हुआ. चेयरमैन जव्वाद सिद्दीकी पर छात्रों से धोखाधड़ी और फर्जी मान्यता का आरोप है. रेड फोर्ट ब्लास्ट से भी यूनिवर्सिटी का नाम जुड़ा है.

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी- फाइल फोटो
अल-फलाह यूनिवर्सिटी- फाइल फोटो

हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी का कैंपस, लाल किला इलाके में हुए धमाके की जांच के बाद जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत इस यूनिवर्सिटी की संपत्ति जब्त करने की तैयारी कर रहा है. ईडी यह जांच कर रही है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में जो पैसा लगाया गया, वह कथित अपराध से कमाई गई रकम यानी ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ से आया है या नहीं.

अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन की गिरफ्तारी
अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जव्वाद अहमद सिद्दीकी को नवंबर में ईडी ने गिरफ्तार किया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों से धोखाधड़ी कर पैसे लिए. ईडी का दावा है कि इन संस्थानों के पास पढ़ाने की वैध मान्यता नहीं थी.

यूनिवर्सिटी की इमारतों में लगाया गया काला पैसा
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में करीब 415.10 करोड़ रुपये की अवैध कमाई सामने आई है, जिसमें से कुछ पैसा फरीदाबाद के धौज इलाके में बनी यूनिवर्सिटी की इमारतों के निर्माण में लगाया गया.

संपत्तियों की पहचान और मूल्यांकन
ईडी अब अल फलाह ट्रस्ट की सभी चल-अचल संपत्तियों की पहचान और कीमत का आकलन कर रही है. जांच पूरी होने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया जाएगा.

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छात्रों की पढ़ाई जारी रहेगी
सूत्रों के अनुसार, संपत्ति जब्त होने के बाद भी छात्रों की पढ़ाई बिना रुकावट जारी रखने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि उनका भविष्य प्रभावित न हो.

सरकारी रिसीवर संभाल सकता है यूनिवर्सिटी
जब जब्ती का आदेश अंतिम रूप ले लेगा, तो सरकार की ओर से नियुक्त रिसीवर यूनिवर्सिटी का प्रशासन संभाल सकता है. इससे शिक्षा का काम चलता रहेगा, जबकि कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी.

लाल किला ब्लास्ट से लिंक
इस यूनिवर्सिटी का नाम उस ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल की जांच में सामने आया, जिसमें 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था. अल फलाह मेडिकल कॉलेज का डॉक्टर उमर-उन-नबी 10 नवंबर को रेड फोर्ट के बाहर कार बम विस्फोट कर 15 लोगों की मौत का जिम्मेदार था.

फर्जी मान्यता का आरोप
ईडी का कहना है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने खुद को यूजीसी मान्यता प्राप्त और एनएएसी से मान्यता प्राप्त बताकर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया. जबकि ये दावे गलत थे.

जमीन घोटाले की भी जांच
ईडी यह भी जांच कर रही है कि दिल्ली में जमीन खरीदने से जुड़े जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के दस्तावेजों में कथित रूप से फर्जीवाड़ा किया गया था. सिद्दीकी के वकील ने अदालत में कहा है कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है और दिल्ली पुलिस की एफआईआर फर्जी हैं. ईडी के मुताबिक, 1990 के दशक के बाद से अल फलाह ग्रुप तेजी से बढ़ा और एक बड़ा शिक्षा समूह बन गया.

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