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'काउ टास्क फोर्स’ में गौरक्षक भी होंगे शामिल, हरियाणा सरकार के फैसले पर फिर विवाद

गायों को लेकर लिए गए हरियाणा सरकार के फैसले पर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल मवेशी तस्करी और गौहत्या के मामलों में शामिल लोगों पर हरियाणा सरकार नकेल कसने जा रही है. सरकार अब जिला स्तर पर 11 सदस्यीय ‘स्पेशल काऊ टास्क फोर्स’ का गठन करेगी.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • काउ टास्क फोर्स में गौरक्षक भी होंगे शामिल
  • फोर्स में सरकारी और गैर-सरकारी सदस्य शामिल होंगे
  • हरियाणा सरकार के फैसले पर फिर विवाद

गायों को लेकर लिए गए हरियाणा सरकार के फैसले पर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल मवेशी तस्करी और गौहत्या के मामलों में शामिल लोगों पर हरियाणा सरकार नकेल कसने जा रही है. सरकार अब जिला स्तर पर 11 सदस्यीय ‘स्पेशल काऊ टास्क फोर्स’ का गठन करेगी. इस फोर्स में सरकारी और गैर-सरकारी सदस्य शामिल होंगे, जिनमें पुलिस, पशुपालन, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारी, गौसेवा आयोग, गौरक्षक समितियों के सदस्य और गौसेवकों को शामिल किया जाएगा.

टास्क फोर्स की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में खुफिया नेटवर्क के माध्यम से मवेशियों की तस्करी और गौकशी के बारे में जानकारी जुटाना और अवैध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई करना है. हरियाणा सरकार की ओर से इस टास्क फोर्स में सरकारी अधिकारियों और पुलिस अफसरों के साथ गौरक्षक दलों के सदस्यों को रखने पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस की प्रवक्ता और नेता रंजीता मेहता ने कहा कि गौरक्षक दल किस तरह से गौतस्करी के नाम पर अवैध वसूली और गुंडागर्दी करते हैं, ये सबके सामने है. ऐसे में सरकार को अगर कोई टास्क फोर्स बनानी है तो उसमें सरकारी कर्मचारी और पुलिस को जगह देनी चाहिए, न कि इस तरह से गौरक्षक दलों से जुड़े लोगों को.

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रंजीता मेहता ने हरियाणा सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार गायों को अनुदान के नाम पर 100 रुपये सालाना देने की बात कर रही है और इससे किसी गौशाला में एक गाय की देखभाल कैसे की जा सकती है? इसी वजह से हरियाणा की गौशालाओं में रोजाना सैकड़ों गायों के मरने की खबरें आती रहती हैं. गायों के नाम पर हरियाणा की खट्टर सरकार सिर्फ दिखावा कर रही है.

वहीं गौरक्षक दलों से जुड़े लोगों ने हरियाणा सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. विश्व हिंदू परिषद, पंजाब के गौरक्षा दल के इंचार्ज जतिंदर दलाल ने कहा कि हरियाणा सरकार ने गौरक्षकों को इस स्पेशल टास्क फोर्स में रखकर उन्हें सम्मान दिया है और गौरक्षकों को अपने इलाके के बारे में पूरी जानकारी होती है कि कहां पर कौन सा वाहन गौतस्करी कर रहा है और कौन लोग गौतस्करी में शामिल हैं. इसलिए हरियाणा सरकार की ये पहल सही है, विपक्षी पार्टियां इस पर राजनीतिक फायदे के लिए सवाल खड़े कर रही हैं.

इस पूरे विवाद पर हरियाणा गौसेवा आयोग के सेक्रेटरी डॉक्टर कल्याण सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि हर जिले में स्पेशल टास्क फोर्स का मकसद प्रदेश में आवारा पशुओं पर लगाम लगाने के साथ गौतस्करी रोकना है. इसमें उन्हीं गौरक्षक दलों से जुड़े लोगों को रखा जाएगा जिनका ट्रैक रिकॉर्ड ठीक रहा है. पूर्व में जो भी गौरक्षक दल मारपीट या गुंडागर्दी में शामिल पाए गए हैं, उनको किसी भी हाल में इस टास्क फोर्स में शामिल नहीं किया जाएगा. हरियाणा पुलिस की ओर से नियुक्त नोडल ऑफिसर को कहा गया है कि इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए. हरियाणा गौसेवा आयोग ने साफ किया कि इस टास्क फोर्स की पूरी निगरानी हरियाणा पुलिस की ओर से नियुक्त नोडल ऑफिसर के पास ही रहेगी.

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