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इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध का असर... कोयले की शुरू हुई क़िल्लत, बंद हो जाएंगे कपड़ा मिल!

इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे वैश्विक तनाव का असर अब सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर दिखने लगा है. इंडोनेशिया से आने वाले कोयले की आपूर्ति बाधित होने से कपड़ा मिलों में किल्लत शुरू हो गई है. उद्योग के पास केवल 15–20 दिन का स्टॉक बचा है. साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतू भाई वखारिया ने चेतावनी दी कि जल्द आपूर्ति नहीं हुई तो मिलें बंद हो सकती हैं.

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15–20 दिन का ही बचा कोयला स्टॉक.(Photo: Sanjay Singh J Rathod/ITG)
15–20 दिन का ही बचा कोयला स्टॉक.(Photo: Sanjay Singh J Rathod/ITG)

सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर दिखाई देने लगा है. कपड़ा मिलों में इस्तेमाल होने वाले कोयले की किल्लत शुरू हो गई है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि समय रहते कोयले का आयात नहीं हुआ तो कपड़ा मिलों को बंद करने की नौबत आ सकती है.

इस संबंध में साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट जीतू भाई वखारिया ने आजतक से बातचीत में बताया कि सूरत का टेक्सटाइल उद्योग पूरी तरह से कोयले पर निर्भर है. कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से उद्योग के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

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रोजाना 40 से 50 टन कोयले की होती है खपत

जानकारी के अनुसार, सूरत की एक औसत टेक्सटाइल यूनिट रोजाना 40 से 50 टन कोयले का उपयोग करती है. शहर में लगभग 400 से 450 ऐसी औद्योगिक इकाइयां हैं, जिनका संचालन कोयले पर निर्भर करता है.

सूरत में इस्तेमाल होने वाला उच्च गुणवत्ता वाला कोयला मुख्य रूप से इंडोनेशिया से समुद्री मार्ग के जरिए आता है. लेकिन वैश्विक युद्ध की स्थिति के कारण समुद्री परिवहन बाधित हो गया है. बड़े जहाज और स्टीमर नहीं आ पा रहे हैं, जिससे कोयले की आपूर्ति में कमी आ गई है.

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कोयले के दाम में 25 फीसदी तक बढ़ोतरी

आपूर्ति कम होने और भविष्य में किल्लत की आशंका के चलते कोयले की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है. उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक कोयले के दाम में करीब 25 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है.

सूरत

उदाहरण के तौर पर 4000 कैलोरी वाले कोयले की कीमत में 800 से 1000 रुपये प्रति टन तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे कपड़ा उद्योग की लागत बढ़ने लगी है और उद्योगों की चिंता भी बढ़ गई है.

15 से 20 दिन का ही बचा कोयला स्टॉक

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में टेक्सटाइल इकाइयों के पास केवल 15 से 20 दिन या अधिकतम एक महीने का कोयला स्टॉक बचा है. यदि जल्द ही कोयले की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो उद्योगों को आंशिक या पूरी तरह से बंद करना पड़ सकता है.

आजतक से बातचीत में जीतू भाई वखारिया ने चिंता जताई कि यदि कोयले की किल्लत जारी रही तो इसका असर केवल टेक्सटाइल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं. उनके अनुसार सूरत का टेक्सटाइल उद्योग एक कड़ी की तरह काम करता है. यदि बुनाई रुकती है तो मिलें बंद होंगी और अंततः पूरी मार्केट पर इसका असर पड़ेगा.

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