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स्टेशन, तालाब, थिएटर और स्कूल...वडनगर के किस्से जहां बीता पीएम मोदी का बचपन

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के जीवन में गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन (Vadnagar Railway Station) का खासा महत्व है. यह वही रेलवे स्टेशन है, जहां कभी नरेंद्र मोदी ट्रेन में चाय बेचा करते थे. आज इस स्टेशन के दिन फिर गए हैं. आइए जानते हैं पीएम मोदी के वडनगर से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से.

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नरेंद्र मोदी की बचपन की तस्वीर नरेंद्र मोदी की बचपन की तस्वीर
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • पीएम मोदी और वडनगर से जुड़े दिलचस्प किस्से
  • वडनगर रेलवे स्टेशन पर मोदी ने बेची थी चाय
  • ट्रेन में ही गुजराती से सीखी थी हिंदी

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के जीवन में गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन (Vadnagar Railway Station) का अहम रोल रहा है. यह वही रेलवे स्टेशन है, जहां बचपन में कभी नरेंद्र मोदी ट्रेन में चाय बेचा करते थे. इस बीच वडनगर रेलवे स्टेशन एक बार फिर से सुर्खियों में हैं, क्योंकि 16 जुलाई को पीएम मोदी इस स्टेशन का डिजिटली उद्घाटन करने वाले हैं. यह रेलवे स्टेशन अब पूरी तरह बदल चुका है, इसे हेरिटेज लुक दिया गया है. आइए जानते हैं पीएम मोदी के वडनगर से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से..

रेलवे स्टेशन पर पिता संग बेची चाय, ट्रेन में सीखी हिंदी

17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे पीएम नरेंद्र मोदी अपने 6 भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे. उनके पिता वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने का काम करते थे. स्कूल के दिनों में नरेंद्र मोदी अपने पिता के काम में बराबर हाथ बंटाते, जब कभी प्लेटफॉर्म पर ट्रेन रुकती तो वह उसमें भी चाय बेचते.

इसी दुकान में चाय बेचते थे नरेंद्र मोदी (फोटो- उज्जवल ओझा)

एक्टर अक्षय कुमार के साथ एक इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने बताया था कि ट्रेन में चाय बेचते हुए उन्हें लोगों को समझने का मौका मिला. इस दौरान कई लोग उन्हें डांटते तो कई समझाते भी. पीएम ने बताया कभी-कभी कि मालगाड़ी से मुंबई के कारोबारी आते थे, हम उन्हें चाय पिलाते और उनसे बातें करते. ऐसा करते-करते हिंदी सीख ली. यानी कि गुजराती जानने-समझने वाला नरेंद्र ट्रेन में चाय बेचते-बेचते हिंदी बोलना सीख गया. 

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बचपन में देखी गरीबी, पॉलिश के भी नहीं थे पैसे

नरेंद्र मोदी ने बचपन में गरीबी देखी, चाय बेचने से लेकर स्कूल फीस तक के लिए जद्दोजहद किया. उनके बचपन का एक किस्सा ये भी है, मोदी को एक बार उनके मामा ने सफेद कैनवस के जूते खरीद कर दिए थे. लेकिन नये जूतों को साफ रखने के लिए उनके पास पॉलिश खरीदने के भी पैसे नहीं थे. ऐसे में स्कूल में बची हुई चाक को पानी में भिगोकर वो पॉलिश बना लेते और वही लेप जूतों पर लगा देते, ताकि जूते सफेद और चमकदार दिखें. 

वडनगर रेलवे स्टेशन (फोटो- उज्जवल ओझा)

पीएम मोदी ने कई मौकों पर इस बात का जिक्र किया है कि वो हमेशा से ही भारतीय सेना में जाना चाहते थे. जामनगर के पास बने सैनिक स्‍कूल में पढ़ना चाहते थे, लेकिन उनके परिवार के पास तब इतने पैसे नहीं थे.

पीएम मोदी का बचपन

एक इंटरव्यू में पीएम नरेंद्र मोदी बताया था कि बचपन में मेरा कोई बैंक अकाउंट नहीं था. गांव में एक बैंक खुला तो सभी बच्चों को गुल्लक दिए गए और कहा गया कि पैसा जमा करना है. लेकिन मेरा गुल्लक हमेशा खाली ही रहा. 

नरेंद्र मोदी और मगरमच्छ का किस्सा 

नरेंद्र मोदी का बचपन भले ही गरीबी में गुजरा हो, लेकिन वो स्वभाव से बेहद हिम्मती थे. एक किस्सा है कि जब वो छोटे थे तो गुजरात के शार्मिष्‍ठा झील में अक्‍सर खेलने जाया करते थे. उन्‍हें पता नहीं था कि उस झील में मगरमच्‍छ भी हैं. 'बाल नरेंद्र' बुक के मुताबिक, यहां से वो एक मगरमच्छ के बच्चे को पकड़कर घर ले लाए. उनकी मां हीरा बा ने जब ये देखा तो बहुत नाराज हुईं और बाद में मां की डांट सुनकर वो मगरमच्छ के बच्चे को वापस छोड़ आए.

शार्मिष्‍ठा झील (फोटो- उज्जवल ओझा)

इसी तरह पीएम मोदी के बारे में ये किस्सा भी प्रचलित है कि स्कूल के दिनों में उन्होंने खंभे पर एक पंछी को फंसा हुआ देखा तो उसे बचाने के लिए वो खंभे के ऊपर चढ़ गए. इस दौरान उन्होंने अपनी जान की भी परवाह नहीं की. 
 
ऐसे मिला थिएटर जाने का मौका

नरेंद्र मोदी को फिल्में देखने का भी शौक था. हालांकि, आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि वो थिएटर जा सकें. ऐसे में उनकी मदद की उनके दोस्त के पिता ने. दरअसल, बचपन में उनके एक दोस्त के पिता थिएटर के बाहर चने बेचते थे. उनके जरिए दोस्त के साथ कभी-कभी थिएटर में जाने का मौका मिल जाता था.

वडनगर रेलवे स्टेशन पर पुरानी चाय की दुकान

हालांकि, नरेंद्र मोदी मनोरंजन के साथ नाटक तैयार करने और मंचन में भी माहिर थे. हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान नरेंद्र मोदी का किस्सा काफी फेमस है. दरअसल, स्कूल का रजत जयंती वर्ष आने वाला था और स्कूल में चारदीवारी नहीं थी. स्कूल के पास इतना पैसा भी नहीं था कि चारदीवारी बनवाई जा सके. ऐसे में नरेंद्र ने नाटक तैयार कर अपने साथियों के साथ मिलकर उसका मंचन किया और इससे जो धनराशि जमा हुई, वो स्कूल की चारदीवारी बनवाने के लिए दान दे दी. 

बचपन से आरएसएस के कैंप में जाते थे नरेंद्र मोदी 

सभी जानते हैं कि नरेंद्र मोदी संघ के स्वयंसेवक रहे हैं. वो आरएसएस की शाखाओं में बचपन से जाते थे. खुद पीएम मोदी के मुताबिक, वो बचपन में आरएसएस के कैंप में जाते थे. वहां कई तरह के खेल होते थे. लेकिन वो योग से ज्यादा जुड़ गए. उन्होंने बताया कि ग्रुप वाले खेल उन्हें ज्यादा पसंद आते थे, इससे व्यक्तित्व में सुधार होता है और टीम भावना विकसित होती है.

वडनगर रेलवे स्टेशन (फ़ाइल फोटो)

आम खाना पसंद, लेकिन सोते हैं कम  

पीएम मोदी की आदतों के बारे में बात करें तो उन्हें आम खाना खूब पसंद है. जब वो छोटे थे तो खेतों में चले जाते और पेड़ से पके हुए आम खाते थे. वहीं, एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने बताया था कि मैं बेहद कम सोता हूं. मेरी नींद कम समय में ही पूरी हो जाती है. कई लोग मुझसे कहते हैं कि ज्यादा नींद लीजिए. पीएम मोदी ने बताया कि एक बार तो इस बात को लेकर बराक ओबामा भी मुझसे उलझ गए थे. 

पीएम मोदी के मुताबिक, वो आंख खुलते ही बिस्तर छोड़ देते हैं. बचपन से ही सुबह उठना पसंद है, चाहे कोई भी मौसम हो. मोदी को बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक है. उन्‍होंने गुजराती में कई कविताएं लिखी हैं. इसके अलावा वे फोटोग्राफी का भी शौक रखते हैं.  


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