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Ahmedabad: गुजरात दंगों के 22 साल बाद गुलबर्ग सोसाइटी में पहली बार मना जश्न, हल्दी की रस्म से लौटी रौनक 

गुजरात के अहमदाबाद में 22 साल बाद दंगा प्रभावित गुलबर्ग सोसायटी में जश्न मनाया गया. वैसे तो सोसाइटी अभी भी खंडहर है, लेकिन मंसूरी परिवार का मकान वहां पर है. रफीक मंसूरी की 19 साल की बड़ी बेटी की शादी के कार्यक्रम की वजह से पहली बार इस सोसाइटी में रौनक वापस दिखी. 

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गुलबर्ग सोसाइटी में मंसूरी परिवार की बेटी की हल्दी की रस्म से लौटी रौनक.
गुलबर्ग सोसाइटी में मंसूरी परिवार की बेटी की हल्दी की रस्म से लौटी रौनक.

अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी का नाम सुनते ही साल 2002 के दंगों की तस्वीर सामने आ जाती है. साल 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में जिन जगहों पर सबसे ज्यादा हिंसा हुई, उनमें गुलबर्ग सोसाइटी भी शामिल है. उस घटना के 22 साल के बाद इसी सोसायटी में पहली बार हल्दी की रस्म मनाई गई. मंसूरी परिवार की बड़ी बेटी की शादी से पहले हल्दी की रस्म में सोसायटी के पुराने साथी भी शामिल हुए. 

वैसे तो सोसाइटी अभी भी खंडहर है, लेकिन मंसूरी परिवार का मकान वहां पर है. दंगों के बाद ही वह लोग वहां पर रहने आ गए थे. सरकारी मुआवजे के बाद अपने मकान को ठीक-ठाक करवा लिया था, जिसमें अब परिवार रहता है. 19 साल की उनकी बड़ी बेटी मिस्बाह की शादी कल मध्यप्रदेश में हुई. शादी के पहले की सभी रस्में इसी गुलबर्ग सोसायटी में पूरी की गईं. 

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पुराने दिनों की याद हुई ताजा- रफीक 

पिता रफीक मंसूरी का कहना है कि इस शादी से सोसायटी में रौनक हो गई थी. पुराने दिन याद आ गए, जब सभी लोग सोसायटी मे मिलजुलकर खुशियां मनाते थे. हालांकि, शादी की रस्मों में सिर्फ पुराने 5-6 परिवार के लोग ही शामिल हुए थे. मगर, सभी पुरानी यादें ताजा हो गईं, जब इसी तरह सोसायटी में सभी फंक्शन होते थे और बड़ी तादाद में लोग शामिल भी होते थे.

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परिवार के 19 लोगों की गई थी जान 

साल 2002 के दंगों में मंसूरी परिवार के 19 लोगों ने जान गंवाई थी. फिर भी अपनी दूसरी कोई जमीन न होने के कारण यह परिवार इसी सोसायटी में रह रहा है. अभी तक एसा कोई सेलिब्रेशन नहीं हुआ था. मगर, रफीक मंसूरी की बड़ी बेटी की शादी की वजह से यहां कई साल बाद रौनक आई और पुराने लोग भी इसमें शामिल हुए. 

सुरक्षा की वजह से नहीं लौट रहे लोग 

इस फंक्शन में शामिल होने वाले इम्तियाज पठान इस सोसाइटी में नहीं रहते हैं. फिर भी न्योता मिलने पर आए थे. उन्होंने कहा कि इस तरह के फंक्शन से खुशी जरूर होती है और बाकी लोग भी वहीं पर आना चाहते हैं. मगर, कई लोगों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है और सुरक्षा की वजह से लोग वापस नहीं लौटे हैं. 

वह भी सोसाइटी में वापस आना चाहते हैं, लेकिन उनका काम दूसरे इलाके में है. ऐसे में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित दिख रहे हैं. उनका कहना है कि बिना किसी वजह के सरकार ने हमारी सुरक्षा वापस ले ली. ऐसे में कैसे वहां जाऊं, जहां पर मैंने दोषियों के नाम बताए थे. हालांकि, मंसूरी परिवार अभी यह मानता है कि जिस तरह सरकार और सामाजिक संस्थाओं ने उनकी मदद की, वैसे ही बाकी लोग वापस लौटे, तो सोसायटी की रौनक वापस आ सकती है.

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