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पाटीदार वोट बैंक को बांटने की रणनीति तो नहीं हार्दिक पटेल की BJP से बढ़ती नजदीकियां?

गुजरात में 1997 में बीजेपी की सरकार बनी, तब से राज्य की राजनीति पाटीदारों के इर्द-गिर्द घूम रही है. अब एक नया समीकरण बन रहा है कि अगर हार्दिक पटेल बीजेपी में जाते हैं और नरेश पटेल कांग्रेस में आते हैं तो पाटीदार समाज के वोट बैंक का बंटवारा हो सकता है.

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हार्दिक पटेल और नरेश पटेल पाटीदार समाज से आते हैं. हार्दिक पटेल और नरेश पटेल पाटीदार समाज से आते हैं.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नरेश पटेल के कांग्रेस में जाने की अटकलों ने BJP को किया चौकन्ना
  • सौराष्ट्र में पाटीदार वोट पाने के लिए हर राजनीतिक दल सक्रिय

गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने आखिरकार अटकलों पर मुहर लगाई और बुधवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. कांग्रेस के लिए ये बड़ा झटका माना जा रहा है. उसके बाद अब गुजरात की राजनीति में एक बार फिर पाटीदारों का मुद्दा छाने लगा है. दरअसल, गुजरात में पाटीदार वोट बैंक निर्णायक स्थिति में है. सौराष्ट्र में पाटीदारों को लुभाने के लिए हर राजनीतिक दल पूरी कोशिश करता है. इसी कड़ी में बीजेपी को भी नई रणनीति के तहत चुनावी मैदान में आते देखा जा रहा है.

गुजरात में 1997 में बीजेपी की सरकार बनी, तब से राज्य की राजनीति पाटीदारों के इर्द-गिर्द घूम रही है. इससे पहले कांग्रेस में माधव सिंह सोलंकी खाम थ्योरी लेकर आए. KHAM यानी क्षत्रिय, दलित, आदिवासी और मुस्लिम. कहा जाता है कि इसी के बाद पाटीदार कांग्रेस से ऐसे रुठे कि अब तक उनकी नाराजगी दूर नहीं हुई और कांग्रेस का साथ नहीं दिया. 

हालांकि, 2017 में जब पाटीदार बीजेपी से रुठे तो इसका खामियाजा पार्टी को भी भुगतना पड़ा और पार्टी 99 सीट पर ही सिमट कर रह गई. इस बीच, अब सौराष्ट्र के पाटीदार नेता नरेश पटेल के कांग्रेस में जाने की अटकलें काफी तेज हैं, वैसे जब ये चर्चा शुरू हुई तो गुजरात बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटील ने एक बयान दिया था और कहा था कि नरेश पटेल एक सामाजिक नेता हैं. अगर वो बीजेपी में नहीं आते हैं तो कोई बात नहीं. मगर, वो राजनीति जॉइन ना करें. 

इसके बाद भी लगातार ये अटकलें चल रही थीं कि नरेश पटेल कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने वाले हैं और राहुल गांधी से भी चर्चा हो रही है. राजनीतिक जानकार कहते हैं कि नरेश पटेल अगर कांग्रेस में जाते हैं तो बीजेपी को एक बड़ा पाटीदार चेहरा चाहिए. जो अभी बीजेपी के पास सौराष्ट्र के अंदर नहीं है. 

एक नया समीकरण यह भी बन रहा है कि अगर हार्दिक पटेल बीजेपी में जाते हैं और नरेश पटेल कांग्रेस में आते हैं तो हो सकता है कि जो सामाजिक और 50 से ज्यादा उम्र के लोग हैं वो नरेश पटेल का साथ दे सकते हैं, लेकिन जो युवा हैं वो हार्दिक पटेल के साथ जुड़ सकते हैं. यह रणनीति सौराष्ट्र के अंदर पाटीदार वोट को बांट देगी और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है.

सौराष्ट्र में 54 विधानसभा सीटें हैं. यहां 2017 के चुनाव में बीजेपी को कांग्रेस से जबरदस्त टक्कर मिली थी. पाटीदार आंदोलन की वजह से कांग्रेस ने सौराष्ट्र में 55% सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी 33% सीटें ही जीत पाई थी. पटेल आंदोलन की वजह से यहां की 54 सीट में से 30 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की, जबकि बीजेपी को 23 सीट मिली थी. अब अगर इस बार भी नरेश पटेल की वजह से पाटीदार वोट कांग्रेस के पाले में जाता है तो सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है. क्योंकि इस बार चुनावी मैदान में आम आदमी पार्टी भी है. 

दिलचस्प यह है कि रविवार यानी 15 मई को ही हार्दिक पटेल, नरेश पटेल, अल्पेश कथेरिया और दिनेश बांभणिया के बीच मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात के बाद हार्दिक ने कहा था कि हां, मैं कांग्रेस से नाराज हूं. लेकिन अब हार्दिक पटेल के इस्तीफे को लेकर भी सवाल खडे़ हो रहे हैं. दरअसल, माना जा रहा है कि हार्दिक जिस तरह से कांग्रेस के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे, उससे अंदेशा था कि कांग्रेस उन्हें पार्टी से निकाल सकती है. इधर, गुजरात बीजेपी के इसी महीने 15 और 16 तारीख को चिंतन शिविर में इस मसले को रखा गया और एक रणनीति बनाई गई. उसके बाद ही हार्दिक ने आज कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. बता दें कि बीजेपी के इस शिविर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे.

दरअसल, हार्दिक पटेल के बीजेपी में जाने की अटकलें अब इसलिए और तेज हो गईं हैं क्योंकि उन्होंने अपने इस्तीफे में भी मोदी सरकार की खुलकर तारीफ की है. जबकि कांग्रेस और खासतौर पर राहुल गांधी को लेकर तंज कसा है. 

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