कल्पना कीजिए आज अगर गंगा नदी को लेकर या यमुना नदी को लेकर हमारे देश का कोई नेता या कोई वर्ग आपत्तिजनक टिप्पणी कर देता है या इन नदियों को जेहाद से जोड़ देता है तो हमारे देश में इस पर कितना विवाद होगा? सोचिए जब इन्हीं नदियां को हमारे देश की व्यवस्था और हमारे देश का समाज एक गंदे नाले में तब्दील कर देता है और इन नदियों की पवित्रता समाप्त कर दी जाती है तो इस पर हमारे देश में किसी की भावनाएं आहत नहीं होती. और ना ही तब किसी को धर्म की चिंता होती है.