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1 अक्टूबर से 28 फरवरी के बीच दिल्ली में बड़ी गाड़ियों की एंट्री बैन करने का आ रहा नियम, जानिए किन गाड़ियों के लिए क्या होंगी पाबंदियां?

दिल्ली सरकार का ये आदेश केवल वाणिज्यक वाहनों पर लागू होगा और निजी वाहनों पर भी कोई रोक नहीं होगी. वहीं, सीएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रकों के अलावा आवश्यक सामान ले जाने वाले डीजल से चलने वाले ट्रकों की एंट्री पर भी कोई रोक नहीं रहेगी. 

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मध्यम और भारी माल वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध का फैसला (फाइल फोटो) मध्यम और भारी माल वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध का फैसला (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केवल वाणिज्यक वाहनों पर लागू होगा आदेश
  • ट्रांसपोर्टरों-व्यापारियों ने की फैसले की आलोचना

दिल्ली सरकार ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अक्टूबर से फरवरी तक मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. ये आदेश केवल वाणिज्यक वाहनों पर लागू होगा. हालांकि, कच्ची सब्जियां, फल, अनाज, दूध और ऐसी जरूरी वस्तुओं को ले जाने वाले वाहनों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी.  

एक अधिकारी के मुताबिक, इस साल एक अक्टूबर से 28 फरवरी तक वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी. उन्होंने कहा कि सर्दियों के महीनों में वाहनों के प्रदूषण से वायु की गुणवत्ता में गिरावट आती है. वहीं, सीएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रकों के अलावा जरूरी सामान ले जा रहे डीजल से चलने वाले ट्रकों की एंट्री पर कोई रोक नहीं रहेगी. निजी वाहनों पर भी कोई रोक नहीं होगी.

ट्रांसपोर्टरों एवं व्यापारियों ने की आलोचना

इस फैसले की ट्रांसपोर्टरों एवं व्यापारियों ने आलोचना की है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि ये फैसला दिल्ली के व्यापार को ऐसे समय में मार देगा, जब राजधानी में त्योहार और शादियों का सीजन होने के कारण व्यापारिक गतिविधियां तेज होती हैं. 

उन्होंने कहा कि परिसंघ केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग करेगा और दिल्ली सरकार के खिलाफ आंदोलन भी शुरू करेगा. CAIT इसे लेकर फैसला करने को अगले सप्ताह दिल्ली के व्यापार मंडल के नेताओं की एक बैठक बुला रहा है. 

इधर, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भीम वाधवा ने दावा किया कि नौकरशाह आम जनता या हितधारकों के बारे में सोचे बिना नीतियां बनाते हैं..उन्होंने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से इस निर्णय पर पुनर्विचार की अपील की. 


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