दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने 2011 में दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल को लूटने और फिर हत्या करने के मामले में तीन युवकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने इनमें से एक की खुद को जुवेनाइल बताने की दलील को भी खारिज कर दिया.
अदालत ने 23 वर्षीय रूदेरमणि, 25 वर्षीय रोहित कुमार और 30 वर्षीय सुनील को सजा सुनाते हुए कहा कि वे उत्तर पश्चिम दिल्ली में काम करने वाले पेशेवर अपराधी हैं और बेरोकटोक घूमते रहते हैं व लोगों को निशाना बनाने की ताक में रहते हैं.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में अनावश्यक सहानुभूति और आदतन और बार बार अपराध करने के आदि दोषियों को अपर्याप्त सजा देने से न्याय व्यवस्था को अधिक नुकसान होगा और कानून से लोगों का भरोसा कम होगा. साथ ही समाज लम्बे समय तक ऐसे गंभीर खतरे में नहीं रह सकता.
अदालत ने कहा कि यह उसका कर्तव्य है कि जिस तरह का अपराध किया गया है, सजा भी उसी तरह की दी जाए. अदालत ने रूदेरमणि को 1.10 लाख रुपये और रोहित एवं सुनील पर प्रत्येक को 1.05 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. इसके साथ ही स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि में से तीन लाख रुपया कांस्टेबल हरकेश मीणा के परिवार को दिया जाए.