देश के सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुन लीं. अब 28 जनवरी को इन दलीलों का जवाब और किए जा रहे उपायों पर चर्चा होगी.
मंगलवार को सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जिस इलाके में मैं रहता हूं, वहां बहुत सारे आवारा कुत्ते हैं. वे पूरी रात एक दूसरे का पीछा करते रहते हैं. मुझे नींद न आने की बीमारी है. मेरा सोना मुश्किल हो गया है. मेरे बच्चे पढ़ नहीं पाते. मैंने अधिकारियों से शिकायत की. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ वैक्सीनेशन और स्टेरिलाइजेशन कर सकते हैं. मैंने NHRC को भी लिखा, कुछ नहीं हुआ. ABC नियम एक खास दायरे में काम करते हैं.
कुत्तों को स्टेरिलाइजेशन या वैक्सीनेशन के लिए ले जाने पर ही उन्हें वापस छोड़ा जाएगा. लेकिन BNS कहता है कि अगर परेशानी हो रही है तो स्थानीय अधिकारी कुत्तों को हटा सकते हैं.
एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि ये बात दुनिया भर में मानी गई है कि आपके पास नसबंदी का एक असरदार सिस्टम होना चाहिए. हालांकि ये नसबंदी सिस्टम जयपुर, गोवा वगैरह में काम कर चुके हैं, लेकिन ज्यादातर शहरों में ये नसबंदी सिस्टम काम नहीं किया है. स्टेरिलाइजेशन से आक्रामकता कम होती है. समस्या ये है कि बहुत सारे शहरों में असरदार स्टेरिलाइजेशन नहीं हो रहा है. इसे असरदार बनाने का तरीका है इसे पारदर्शी बनाना और लोगों को जवाबदेह बनाना. एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जहां लोग उन आवारा कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जो स्टेरिलाइज्ड नहीं लगते हैं. इसे किसी वेबसाइट पर रिकॉर्ड या रिपोर्ट किया जाना चाहिए.
कुछ खास अथॉरिटी होनी चाहिए जिनकी जिम्मेदारी बिना स्टेरिलाइज्ड आवारा कुत्तों की शिकायत पर कार्रवाई करना होगा. प्रशांत भूषण के सुझाव पर जस्टिस मेहता ने कहा कि हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते?
भूषण ने कहा कि कभी-कभी कोर्ट की टिप्पणियों से बुरे मैसेज जाते हैं. उदाहरण के लिए इसी कोर्ट ने कहा कि कुत्तों के काटने के लिए फीडर्स को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. शायद यह एक व्यंग्य था.
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि ये गलतफहमी है कि हमने ये व्यंग्य में कहा था. हमने व्यंग्य में नहीं बल्कि ये बहुत गंभीरता से कहा था.एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट और पूर्व केन्द्रीय मंत्री द्वारा इस मामले में किए गए पॉडकास्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई...
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री की तरफ से पेश हुए वकील राजू रामचंद्रन से कहा कि थोड़ी देर पहले आप कोर्ट से कह रहे थे कि हमें टिप्पणियों को लेकर सावधान रहना चाहिए. क्या आपको पता चला कि आपके क्लाइंट किस तरह की बातें कर रही हैं? आपके क्लाइंट ने कोर्ट की अवमानना की है. हम उस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. ये हमारी दरियादिली है. क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उनकी बॉडी लैंग्वेज कैसी है? वो क्या कहती हैं और कैसे कहती हैं. आपने टिप्पणी की कि कोर्ट को सावधान रहना चाहिए. दूसरी ओर, आपकी क्लाइंट जिसे चाहे और जिसके बारे में चाहे, हर तरह की टिप्पणियां कर रही हैं!
SC ने राजू रामचंद्रन से पूछा कि आपकी क्लाइंट एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट हैं, वो कैबिनेट मंत्री रही थीं. इन स्कीमों को लागू करने के लिए बजट आवंटन में आपकी क्लाइंट का क्या योगदान रहा है?राजू रामचंद्रन ने कहा कि मैं इसका जवाब नहीं दे सकता.
सुप्रीम कोर्ट में 28 जनवरी को दोपहर दो बजे आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट में आज सभी याचिकाकर्ताओं की दलील पूरी हो गई.अब 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल और उनके सहयोगी याचिकाकर्ताओं की दलीलों का जवाब देते हुए अपनी दलीलें रखेंगे.