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दिल्ली : क्रॉस मसाज पर पाबंदी, स्पा सेंटर्स मालिक बोले- बढ़ेगा अलग तरह का देह व्यापार

साउथ दिल्ली नगर निगम ने स्पा और मसाज सेंटर्स के लिए नई लाइसेंस पॉलिसी को लागू किया. इसके तहत स्पा और मसाज सेंटर्स में क्रॉस-जेंडर मसाज की इजाजत नहीं होगी. इस नियम के मुताबिक, महिलाओं वाले स्पा-मसाज सेंटर में पुरुष और पुरुषों द्वारा संचालित स्पा में महिलाएं नहीं जा सकेंगी.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साउथ दिल्ली नगर निगम ने स्पा और मसाज सेंटर्स में क्रॉस जेंडर मसाज पर रोक लगाई
  • रिहायशी इलाकों में नए मसाज सेंटर्स खोलने पर भी रोक

राजधानी दिल्ली में साउथ दिल्ली नगर निगम (SDMC) ने स्पा और मसाज सेंटर्स में क्रॉस जेंडर मसाज पर रोक लगा दी है. यानी अब पुरुष का मसाज महिला और महिला का मसाज पुरुष नहीं कर सकेगा. इसके अलावा साउथ दिल्ली नगर निगम के नए आदेश के मुताबिक, रिहायशी इलाकों में नए मसाज सेंटर्स खोलने पर भी रोक लगाई गई है. वहीं, स्पा और मसाज सेंटर्स ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे जेंडर डिस्क्रिमिनेशन करार दिया और कहा कि इससे अलग तरह का देह व्यापार बढ़ेगा. 

दरअसल,  साउथ दिल्ली नगर निगम ने स्पा और मसाज सेंटर्स के लिए नई लाइसेंस पॉलिसी को लागू किया. इसके तहत स्पा और मसाज सेंटर्स में क्रॉस-जेंडर मसाज की इजाजत नहीं होगी. इस नियम के मुताबिक, महिलाओं वाले स्पा-मसाज सेंटर में पुरुष और पुरुषों द्वारा संचालित स्पा में महिलाएं नहीं जा सकेंगी. 

'समझ से परे है फरमान'
दिल्ली स्पा एसोसिएशन के अध्यक्ष पूजा चटर्जी ने कहा कि जिम सैलून और आर्मी तक में स्त्री पुरुष से भेदभाव नहीं किया जाता. ऐसे में सरकारी फरमान समझ से परे है. पूजा ने कहा कि ट्रांसजेंडर मसाज पूरी तरह से जेंडर डिस्क्रिमिनेशन है. ऐसे में अस्पताल जाने पर कोई कैसे किसी नर्स से इलाज नहीं लेता क्योंकि वह एक महिला है. 

रोहिणी स्थित स्पर्श स्पा के मालिक रवि टंडन ने फैसले का विरोध करते हुए जेंडर डिस्क्रिमिनेशन करार दिया और फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख करने की बात कही है. रवि का कहना है इस फैसले के पीछे देह व्यापार रोकने की बात लगती है लेकिन इससे एक अलग तरह के देह व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है. वहीं बिना लाइसेंस वाले अवैध स्पा की आड़ में देह व्यापार को अंजाम देते हैं. उनकी वजह से पूरी स्पा कम्युनिटी का काम छीन लेना किसी तरह से जायज नहीं है. 

एक कस्टमर ने नाम ना छापने की शर्त पर यह कहा कि जब महिला पुरुषों को ही दिक्कत नहीं है ऐसे में इस तरह की पॉलिसी समझ से परे और आम लोगों पर थोपी जा रही है. 

 

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