खून से रंगी दिवारें, मासूमों की चीखें... दिल्ली के चंदन पार्क में रात के अंधेरे में दर्दनाक कत्लेआम हुआ. रात के करीब नौ बजे थे. दिन भर की थकान के बाद दिल्ली का यह इलाका धीरे-धीरे सोने की तैयारी में था. गलियों में रोशनी कम हो रही थी, दुकानों के शटर गिरने शुरू रहे थे, और घरों में बच्चों को नींद आने लगी थी.
उत्तरी बाहरी दिल्ली के समयपुर बादली इलाके के चंदन पार्क में भी रात का सन्नाटा पसरने लगा था. लेकिन 60 फीट रोड, गली नंबर तीन में बने एक मकान के भीतर उस वक्त जो हो रहा था वो रात के उस अंधेरे को और भी गहरा और भयावह बना रहा था.
जब पड़ोस में रहने वाली एक महिला की नज़र उस घर पर पड़ी, तो रात के धुंधलके में भी उसे कुछ असामान्य लगा. दरवाज़े की दरारों से बाहर रिसती गहरी लाल लकीर खून. हिम्मत जुटाकर जब उसने झांका, तो अंदर का मंजर देखकर उसकी चीख गले में ही घुट गई. रात के उस सन्नाटे में कांपते हाथों से उसने फोन उठाया और पुलिस को सूचना दी.
देर नहीं हुई. समयपुर बादली थाने की पुलिस टीम रात के अंधेरे को चीरते हुए मौके पर पहुंची. जब दरवाज़ा खुला, तो सामने था एक ऐसा मंजर जिसे देखकर सख्त से सख्त पुलिस अफसर की भी आंखें फटी की फटी रह गईं. कमरे में अलग-अलग जगहों पर चार शव पड़े थे. खून से लथपथ. निर्जीव. बेआवाज़. रात की खामोशी में वो खून के धब्बे और भी चीख रहे थे.
मृतक महिला की पहचान अनीता के रूप में हुई. एक मां, जिसने शायद उस रात अपने बच्चों को खाना खिलाया होगा, उन्हें सुलाने की कोशिश की होगी और फिर किसी ने उन्हें हमेशा के लिए सुला दिया. उसके साथ उसके तीन मासूम बच्चे भी इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे. सबसे बड़ा मात्र 7 साल का, दूसरा 5 साल का, और सबसे छोटा जो अभी ठीक से दुनिया को समझना भी नहीं सीखा था महज 3 साल का. तीनों की गर्दनें रेती हुई थीं. किसी धारदार हथियार से किए गए इस रात के कत्लेआम ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया.
वो 3 साल का बच्चा, जो उस रात शायद मां की गोद में सोने की जिद कर रहा होगा, जो थका हुआ था और नींद में आंखें मींच रहा होगा उसका गला किसी ने रेत दिया. यह हत्या नहीं, यह नरसंहार था. यह दरिंदगी की हर हद को पार कर जाने वाला जुर्म था और यह जुर्म हुआ रात के उस वक्त, जब पूरी दुनिया सो रही थी.
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पुलिस ने जब मौके का जायज़ा लिया, तो साफ था कि यह काम अचानक का नहीं था. रात के अंधेरे का फायदा उठाकर यह वारदात अंजाम दी गई थी. वारदात में इस्तेमाल धारदार हथियार की क्रूरता, और चारों की एक ही तरीके से की गई हत्या. यह सब एक सोची-समझी, ठंडे दिल से रची गई साज़िश की गवाही दे रहे थे. क्राइम टीम और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने रात में ही मौके की बारीकी से जांच की, सबूत इकट्ठे किए, और हर कोने को खंगाला.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आरोपी कहां है? शक की सुई घूमती है अनीता के पति की तरफ. जिस घर में उसकी पत्नी और तीन बच्चों के शव पड़े थे, वो खुद उसी रात वहां से फरार हो चुका था. रात के अंधेरे ने उसे भागने में मदद की न कोई निशान, न कोई सुराग, बस खून के धब्बे और मातम में डूबा एक घर.
पुलिस ने तुरंत एक टीम गठित कर उसकी तलाश शुरू कर दी. रात भर अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की गई, नाकेबंदी की गई और जानकारों से पूछताछ जारी रही.
अनीता के परिजनों को जब रात के उस अंधेरे में इस दर्दनाक खबर की सूचना मिली, तो मातम छा गया. वो घर जो कभी हंसी-खुशी से गूंजता था, आज सिसकियों से भर गयां एक मां गई, तीन मासूम गए और पीछे छूट गया एक सवाल: क्यों?
चारों शवों को रात में ही पोस्टमार्टम के लिए नज़दीकी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत का सटीक कारण और वारदात की पूरी तस्वीर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद और साफ़ होगी.
दिल्ली जो पहले से ही महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है. एक बार फिर इस बर्बर घटना के बाद कठघरे में खड़ी है. चंदन पार्क की वो गली आज रात भी सन्नाटे में डूबी है.