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राज्यसभा में AAP के डिप्टी लीडर पद से हटाए गए राघव चड्ढा, शेयर किया वीडियो और इमोजी

AAP से राज्यसभा उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने बिना कुछ लिखे वीडियो और नजर इमोजी शेयर कर प्रतिक्रिया दी. पार्टी ने उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया है. इस कदम से पार्टी के अंदर मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है, हालांकि नेतृत्व इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहा है.

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राघव चड्ढा को मई 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) का राज्यसभा सांसद चुना गया था (Photo: PTI)
राघव चड्ढा को मई 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) का राज्यसभा सांसद चुना गया था (Photo: PTI)

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा उपनेता पद से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कोई बयान देने के बजाय एक वीडियो साझा किया, जिसमें संसद में उनके द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों को दिखाया गया है. इस वीडियो के साथ उन्होंने कोई कैप्शन नहीं लिखा, बल्कि सिर्फ नजर का इमोजी लगाया, जिसे आम तौर पर नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है.

इस वीडियो में 37 साल के सांसद को संसद के ऊपरी सदन में कई अहम मुद्दों को उठाते हुए दिखाया गया है. इनमें वायु प्रदूषण, बढ़ते हवाई किराए, गिग वर्कर्स के अधिकार और मोबाइल प्रीपेड प्लान की 28 दिन की वैधता जैसे रोजमर्रा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं. इस वीडियो के जरिए उन्होंने बिना कुछ कहे अपनी सक्रियता और भूमिका को दिखाने की कोशिश की है.

इससे पहले, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने की जानकारी दी थी. पार्टी ने उनके स्थान पर पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है. पार्टी के इस कदम ने अंदरूनी मतभेदों की अटकलों को जन्म दिया है.

 

पार्टी ने अशोक मित्तल को बनाया नया उपनेता

पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि राघव चड्ढा को अब राज्यसभा में पार्टी के कोटे से बोलने का समय भी नहीं दिया जाए. यह फैसला कई राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इस फैसले को सामान्य प्रक्रिया बताया है और कहा है कि सभी को बोलने का अवसर मिलना चाहिए.

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यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब राघव चड्ढा की पार्टी से जुड़े मुद्दों पर चुप्पी और कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से उनकी दूरी पर भी सवाल उठ रहे थे. हाल के महीनों में वह कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आए, जिनमें अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाले कार्यक्रम भी शामिल हैं.

राघव चड्ढा को कभी अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता था. उन्होंने खासकर पंजाब और दिल्ली में पार्टी की राजनीति में अहम भूमिका निभाई थी. लेकिन हाल के समय में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच समीकरण बदलते हुए नजर आए हैं.

चुप्पी और दूरी से बढ़ीं अंदरूनी मतभेद की चर्चाएं
 

मार्च 2024 में जब दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार किया गया था, उस समय राघव चड्ढा विदेश में इलाज के लिए गए हुए थे. केजरीवाल की करीब छह महीने की जेल अवधि के दौरान भी वह देश से बाहर ही रहे और उनकी रिहाई के कुछ दिनों बाद ही उनसे मुलाकात की.

हाल ही में जब दिल्ली की एक अदालत ने केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं को आबकारी मामले में राहत दी, तब भी राघव चड्ढा ने कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी. इसके अलावा उन्होंने केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस और जंतर मंतर पर हुई रैली में भी हिस्सा नहीं लिया.

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इन सबके बावजूद, राघव चड्ढा संसद के अंदर और बाहर कई मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं. वह युवाओं के बीच एक लोकप्रिय नेता के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं और रोजमर्रा से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते हैं. पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा को राज्यसभा में वित्त संबंधी स्थायी समिति का सदस्य भी बनाया गया है.

केजरीवाल के करीबी माने जाते थे, अब बदलते दिख रहे समीकरण

उनकी जगह उपनेता बनाए गए अशोक मित्तल ने इस बदलाव को सामान्य प्रक्रिया बताया है. उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी को बोलने का मौका मिलता है और राघव चड्ढा को भी भविष्य में राज्यसभा में बोलने का अवसर दिया जाएगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में राघव चड्ढा की भूमिका को लेकर पार्टी आगे निर्णय करेगी.

मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में कुल 10 सदस्य हैं, जिनमें से 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से हैं. राघव चड्ढा का यह पोस्ट और पार्टी का फैसला, दोनों ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं और आने वाले समय में इसके और असर देखने को मिल सकते हैं.


 

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