दिल्ली को ऑक्सीजन देने के हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है. केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश में बदलाव की मांग की है. रविवार के दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को फिर फटकार लगाई. इससे पहले शनिवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वे दिल्ली को 490 MT ऑक्सीजन मुहैया कराए.
एडवोकेट राहुल मेहरा ने कहा दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली में कुछ ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर हुई है. लेकिन केंद्र सरकार दिल्ली को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं दे रही है. जबकि कुछ राज्यों में केंद्र सरकार ज्यादा ऑक्सीजन दे रही है, जिसमें मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं.
दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि यदि हम (दिल्ली सरकार) अपने संसाधनों का उपयोग करके अपने लिए टैंकरों की व्यवस्था कर सकते हैं, तो केंद्र अपनी सभी शक्तियों का उपयोग क्यों नहीं कर सकता है? दिल्ली के लिए केंद्र अधिक ऑक्सीजन क्यों नहीं दे सकता? क्या केंद्र सरकार आवंटन से अधिक 100 मीट्रिक टन नहीं दे सकती है?
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है कि दिल्ली ने 700MT ऑक्सीजन की मांग नहीं की है. यहां के लिए टैंकरों का इंतजाम केंद्र को करना है. दिल्ली सरकार ने अपनी ओर से ऑक्सीजन और सात टैंकरों का भी इंतजाम किया है. दिल्ली सरकार ने कहा कि कल शनिवार को भी लगभग हर अस्पताल से SoS कॉल आई हैं. सीताराम भरतिया, वेंकेश्वर और महाराजा अग्रसेन अस्पतालों ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि उनकी ऑक्सीजन खत्म होने वाली है.
इस पर दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट ने कहा कि वो इन अस्पतालों की समस्या देखें. केंद्र सरकार की तरफ से SG तुषार मेहता ने कहा कि ऐसा नहीं है कि ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं है, ऑक्सीजन की आपूर्ति ठीक से संचारित हो रही है. अगर इसका सही तरह से उपयोग किया जाए तो अंतिम मिनट के अलार्म से बचा जा सकता है.
दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि दिल्ली ऑक्सीजन का उपयोग सही तरीके से नहीं कर रहा है. इसका अर्थ है कि डॉक्टर उसे सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. दिल्ली सरकार इसका सही इस्तेमाल नहीं कर रही है. दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि ऑक्सीजन आवंटन के समय इस पर विचार नहीं किया जाता है. ऑक्सीजन सप्लाई व्यवस्था पूरी विफल हो चुकी है.
दिल्ली सरकार ने कहा हम हर दो घंटे पर टैंकर की जानकारी चाहते थे तो इसपर सभी आपूर्तिकर्ताओं द्वारा आपत्ति जताई गई. केंद्र सरकार के नोडल अधिकारी पीयूष गोयल ने कहा कि हमारे सभी अधिकारी कड़ी मेहनत कर रहे हैं, हमारे पास पूरे देश क्व लिए पर्याप्त टैंकर नहीं हैं, यही कारण है कि हम आयात कर रहे हैं, हम युद्ध के स्तर पर काम कर रहे हैं.
इस बहस के बाद दिल्ली हाईकोर्ट का अहम आदेश आया कि ऑक्सीजन सिलेंडर, मेडिकल उपकरण और दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी को सरकार रोके. ये अत्यंत आवश्यक जीवन रक्षक MRP पर ही बेचे जाएं. जो भी MRP से ज्यादा पर बेचें उनके खिलाफ कार्रवाई हो. दिल्ली सरकार ऐसे लोगों की सूची दिल्ली हाईकोर्ट को दे. हाईकोर्ट अलग से इनपर अवमानना का मामला चलाएगा.
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट से शनिवार के आदेश से अवमानना की कार्रवाई वाला भाग हटाने की गुहार लगाई. तुषार मेहता ने कहा हम जानते हैं कि अधिकारी कड़ी मेहनत कर रहे हैं, हमारे कई अधिकारी कोरोना संक्रमित हैं. केन्द्र ऑक्सीजन सप्लाई में पूरी सहायता करेगा. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ से कहा कि दिल्ली सरकार उसे आवंटित की गई ऑक्सीजन की ढुलाई के लिये कुछ टैंकरों को छोड़कर बाकी का प्रबंध करने में पूरी तरह नाकाम रही है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई दूसरा राज्य इस तरह की समस्या का सामना नहीं कर रहा है क्योंकि उनको उनके हिस्से की पूरी ऑक्सीजन मिल रही है.
केंद्र सरकार ने कहा कि जो लोग ऐसे संकट में कालाबाजारी कर रहे हैं शायद उनको भगवान माफ कर दें लेकिन सरकार उनको माफ नहीं करेगी. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है कि ब्लैक मार्केटिंग को रोकने के लिए बड़े स्तर पर पब्लिसिटी की जाए और जारी हेल्पलाइन की जानकारी साझा की जाए.
अदालत ने पहले क्या कहा था?
अदालत ने शनिवार को दिल्ली के बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते डॉक्टर समेत 12 रोगियों की मौत पर नाराजगी जताते हुए केन्द्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय राजधानी को प्रतिदिन के हिसाब से आवंटित 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिले. अदालत ने कहा था कि अब बहुत हो चुका और पानी सिर से ऊपर जा चुका है.
पीठ ने कहा कि केन्द्र यह सुनिश्चित करे कि दिल्ली को 'किसी भी माध्यम से' आवंटित ऑक्सीजन मिले.अदालत ने कहा था कि ऐसा न करने पर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है.
केन्द्र ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि दिल्ली को जितनी ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है, उसका भी सही ढंग से वितरण या इस्तेमाल नहीं किया जा रहा, जिसके चलते दिल्ली के निवासियों की जान पर खतरा पैदा हो गया है.