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निर्भया मामला: मुकेश की नई चाल, फांसी पर रोक लगाने के लिए SC में याचिका

मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उसके साथ निष्पक्ष न्याय नहीं हुआ है. उसने कहा, घटना के वक्त वो दिल्ली में मौजूद नहीं था बल्कि राजस्थान में था. मुकेश ने अपनी याचिका में डीएनए और आयरन रॉड दोनों ही थ्योरी पर सवाल उठाया है.

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सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फांसी पर रोक लगाने की मांग (मुकेश की फाइल फोटो-IANS)
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फांसी पर रोक लगाने की मांग (मुकेश की फाइल फोटो-IANS)

  • मुकेश का डीएनए और आयरन रॉड थ्योरी पर सवाल
  • दस्तावेज़, रिकॉर्ड, रिपोर्ट की सीबीआई जांच की मांग

निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के एक दोषी मुकेश ने फांसी से बचने के लिए नई चाल चली है. उसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फांसी पर रोक लगाने की मांग की है. बता दें, देश को झकझोर देने वाले निर्भया मामले के दोषी फांसी के फंदे से बचने के लिए कई तरीके आजमा रहे हैं. दिल्ली की तिहाड़ जेल में चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने की तारीख 20 मार्च, 2020 मुकर्रर की जा चुकी है.

चार में एक दोषी मुकेश ने अपनी अर्जी में मांग की है कि फांसी से पहले उसे किसी भी कोर्ट में याचिका दाखिल करने की इजाजत दी जाए. मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि उसके साथ निष्पक्ष न्याय नहीं हुआ है. उसने कहा, घटना के वक्त वो दिल्ली में मौजूद नहीं था बल्कि राजस्थान में था. मुकेश ने अपनी याचिका में डीएनए और आयरन रॉड दोनों ही थ्योरी पर सवाल उठाया है. उसने कहा, इस मामले के दस्तावेज़, रिकॉर्ड और रिपोर्ट सीबीआई से जांच कराई जाए और कोर्ट उसे मंगाए.

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इससे पहले मुकेश ने बुधवार को निचली अदालत के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. निचली अदालत ने मुकेश की फांसी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. मुकेश ने अपनी याचिका में दावा किया है कि वह 16 दिसंबर, 2012 को अपराध होने के दौरान दिल्ली में नहीं था. यह याचिका वकील एम.एल.शर्मा की ओर से दायर की गई है और इसमें निचली अदालत के फैसले को रद्द करने की मांग की गई है.

ये भी पढ़ें: निर्भया केस: फांसी रद्द करने की मांग, मुकेश की याचिका पर HC ने फैसला रखा सुरक्षित

मंगलवार को मुकेश ने पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की और अपनी फांसी की सजा को रद्द किए जाने की मांग की. उसने अपनी याचिका में बताया कि 16 दिसंबर, 2012 को इस अपराध के होने के दौरान व दिल्ली में मौजूद नहीं था. अपने तर्क के समर्थन में मुकेश ने दावा किया है कि उसे राजस्थान से गिरफ्तार किया गया और उसे घटना के एक दिन बाद 17 दिसंबर, 2012 को दिल्ली लाया गया. मुकेश के साथ अन्य तीन दोषियों-अक्षय, पवन और विनय को 20 मार्च सुबह 5.30 बजे फांसी दी जानी है.

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