पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उन्हें एक सरकारी बंगला 15 दिनों के भीतर खाली करने का निर्देश दिया गया था. अब इस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पूर्व सांसद शरद यादव के वकील बंगले को खाली करने की सही तस्वीरें पेश नहीं कर रहे हैं.
इस पर कोर्ट ने सरकार से कहा कि शरद यादव के खराब स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मानवीय आधार पर बंगला खाली कराने के लिए कुछ समय देना उचित होगा. वहीं, शरद यादव की ओर से कोर्ट में पेश हुए उनके वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि शरद यादव को कुछ और समय दिया जाए. मेरे मुवक्किल बंगला खाली करने के लिए तैयार हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि सरकारी वकील हमें गुरुवार तक निर्देश लेकर बताएंगे. उसके बाद अगली तारीख पर गौर किया जाएगा. शरद यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर लुटियंस दिल्ली में अपना बंगला बनाए रखने की गुहार लगाई है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 मार्च को उन्हें 15 दिनों के अंदर बंगला खाली करने का आदेश दिया था. यानी आगामी तीन दिन के अंदर उन्हें बंगला खाली करना है. उन्होंने शीर्ष अदालत से मांग की है कि लुटियंस दिल्ली में उन्हें मिला बंगला खाली ना कराया जाए. बता दें कि पार्टी में अंदरूनी कलह और मतभेद के बाद दिसंबर 2017 में शरद यादव को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया था.