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केजरीवाल के सैंडल देखकर शर्मिंदा हुआ इंजीनियर, जूते खरीदने के लिए भेजे पैसे

जनवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में अरविंद केजरीवाल सैंडल पहनकर गए थे. उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी.

राष्ट्रपति भवन के एक कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल फाइल फोटो राष्ट्रपति भवन के एक कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल फाइल फोटो

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की सैंडल वाली तस्वीरों को बार-बार देखकर एक कारोबारी ने उन्हें नए जूते खरीदने के लिए चंदा भेजा है. आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रहने वाले कारोबारी सुमित अग्रवाल ने केजरीवाल को 364 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट भी भेजा है. ड्राफ्ट के साथ सुमित एक खुला खत लिखकर उनसे औपचारिक समारोहों में पहनने के लिए जूते खरीदने का अनुरोध किया है.

सादगी का ज्यादा दिखावा न करें केजरीवाल
खत में सुमित ने लिखा है कि चंदे से केजरीवाल अपने लिए जूते खरीद लें और अगली बार किसी खास मौके पर सैंडल पहनकर न चले जाएं. जनवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में केजरीवाल सैंडल पहनकर गए थे. उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी. सुमित ने लिखा है कि दिल्ली के सीएम की सैलरी हाल में ही बढ़ाई गई है. उनको करीब 2 लाख रुपये मिलते हैं. फिर भी वह ऐसे खास मौकों पर सैंडल पहनकर चले जाते हैं. यह हौज खास पर उनके किसी दोस्त की बर्थडे पार्टी नहीं थी, यह राष्ट्रपति भवन का औपचारिक रात्रिभोज था. खास मौके की अपनी अहमियत होती है. दिखावा करना अच्छी बात नहीं, लेकिन अपनी सादगी का जरूरत से ज्यादा दिखाना अधिक बुरी बात है.

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में आएं तो ऐसे न आएं
केजरीवाल को लिखे इस खुले खत में सुमित ने लिखा कि मेरे शहर में इस हफ्ते के अंत में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू आयोजित होगा. ऐसे मौके अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने और दूसरे देशों के साथ दोस्ती का संबंध बनाने के लिए होते हैं. इस मौके पर 60 देशों के प्रतिनिधि आएंगे. संभावना है कि आपको भी बुलावा मिले. इसी वजह से आपको यह खत लिख रहा हूं.

कम रकम भेजने की बताई वजह
सुमित ने लिखा कि सर, आईआईटी या ऐसे ही किसी दूसरे प्रतिष्ठित से नहीं पढ़ा हूं, लेकिन आपकी तरह मैं भी एक मकैनिकल इंजीनियर हूं. आपकी तरह मैं मारवाड़ी (बनिया) भी हूं. आपकी तरह मेरे अंदर आम आदमी का वह स्वाभाविक आकर्षण नहीं है. इसीलिए बहुत कोशिश करने के बाद भी मैं बस 364 रुपये जुटा पाया हूं. इतने पैसे एक मुख्यमंत्री के लिए काफी नहीं हैं, लेकिन मेरा आपसे अनुरोध है कि कृपया इस छोटे से योगदान को स्वीकार करें. इससे अपने लिए एक जोड़ी बढ़िया ब्लैक फॉर्मल शूज खरीद लें. अगर आपको और पैसों की जरूरत हो तो मुझे लिखें. जरूरत पड़ी तो मैं कुछ और पैसे जुटाने के लिए पूरे शहर का चक्कर लगा आऊंगा.

दिलाया राष्ट्रपति भवन के पुराने ड्रेसकोड का ध्यान
खत के अंत में सुमित ने ध्यान दिलाया है कि केआर नारायणन की तरह कुछ पूर्व राष्ट्रपतियों ने राष्ट्रपति भवन में आने वाले अपने मेहमानों के लिए ड्रेसकोड तय कर दिया था. अगर केजरीवाल अपने तरीके नहीं बदलते हैं, तो शायद राष्ट्रपति भवन को अपना तरीका बदलना पड़े और पुराना नियम अपनाना पड़ सकता है.

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